जरुरी जानकारी | विदेशों में मजबूती के बीच तेल-तिलहन कीमतों में सुधार का रुख

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी बाजारों के सुधार के बीच दिल्ली बाजार में शनिवार को तेल तिलहन कारोबार में मजबूती का रुख दिखा और कोई कामकाज नहीं होने के बीच बिनौलातेल की कीमत पूर्ववत रहने के अलावा सरसों, मूंगफली एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतों में पर्याप्त सुधार आया।

नयी दिल्ली, 22 जुलाई विदेशी बाजारों के सुधार के बीच दिल्ली बाजार में शनिवार को तेल तिलहन कारोबार में मजबूती का रुख दिखा और कोई कामकाज नहीं होने के बीच बिनौलातेल की कीमत पूर्ववत रहने के अलावा सरसों, मूंगफली एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतों में पर्याप्त सुधार आया।

शिकागो एक्सचेंज में कल रात 1.5 प्रतिशत का सुधार था और कल रात सूरजमुखी तेल में भी लगभग दो प्रतिशत का सुधार आया। विदेशों में इस तेजी के कारण स्थानीय अधिकांश तेल तिलहन में भी मजबूती देखने को मिली।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि सरसों में सुधार होने का कारण इसी हल्की फुल्की मांग का बढ़ना है। दूसरी ओर देश में मूंगफली के बेहतर दाने की उपलब्धता कम है जो अक्टूबर नवंबर में मूंगफली के नयी फसल के आने के बाद ही मिलने की संभावना है। इस वजह से मूंगफली तेल तिलहन में भी सुधार आया।

शिकागो एक्सचेंज में तेजी की वजह से यहां सोयाबीन तेल तिलहन के दाम भी मजबूत हो गये। विदेशों में तेजी का असर सीपीओ और पामोलीन पर भी हुआ जिनके तेल के दाम मजबूती दर्शाते बंद हुए। बिनौला में कोई कामकाज नहीं है और अच्छे माल की कमी है।

कारोबारियों ने कहा कि राज्य सरकारें जैसे अन्य खाने पीने के सामान की गुणवत्ता की समय समय पर जांच करवाती है, उसे एनसीडीईएक्स के स्टॉक में रखे बिनौला की भी जांच करवानी चाहिये।

सूत्रों ने कहा कि एनसीडीईएक्स ने अगस्त-सितंबर अनुबंध के लिए अपने वायदा कारोबार में लगभग 72 हजार टन के सौदे कर रखे हैं और उसके पास स्टॉक बचा है लगभग 28,000 टन फिर सौदों की डिलीवरी कैसे होगी? क्या वायदा कारोबार का इस्तेमाल सट्टेबाजी के लिए किया जायेगा?

सूत्रों ने कहा कि खाने पीने की सभी वस्तुओं के वायदा कारोबार को बंद किया जाना चाहिये क्योंकि इसमें जानबूझकर घट बढ़ की जाती है, जिसका असर सभी खाद्य वस्तुओं पर होता है।

सूत्रों ने कहा कि आज के हिसाब से विदेशों से सोयाबीन तेल आयात करने का भाव 92.50 रुपये किलो पड़ता है और यहां बंदरगाह पर यह तेल के बिकने का भाव 87.50 रुपये किलो है। बैंकों का साख पत्र (लेटर आफ क्रेडिट) चलाते रहने के लिए कारोबारी जानबूझ कर सस्ते में भी खाद्यतेल बेच रहे हैं। जिस तरह अब विदेशों में खाद्यतेलों के दाम बढ़े हैं और उसी के हिसाब से हमारे यहां भी कारोबार का रुख तय हो रहा है इससे लगता है कि अब देश के तेल तिलहन बाजार, विदेशी घट बढ़ पर निर्भर हो जायेंगे जो कहीं से अच्छी बात नहीं होगी। वैसे तो अभी भी देश में सरसों दाना और सरजमुखी बीज, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बिक रहे है।

शनिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 5,525-5,575 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 7,425-7,475 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 18,000 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,610-2,885 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 10,800 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,785 -1,865 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,785 -1,895 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,500 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,750 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,400 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,350 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,700 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,750 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,000-5,095 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,765-4,860 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,015 रुपये प्रति क्विंटल।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

\