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जरुरी जानकारी | तेल पेराई मिलें बेहाल, सभी खाद्य तेलों के भाव धराशायी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. लंबे समय से घाटे का कारोबार जारी रहने और देश की तेल पेराई मिलों के साथ साथ देशी तिलहन किसान, आयातक एवं अन्य अंशधारकों की बदहाल होती हालत के बीच तेल-तिलहन बाजारों में बृहस्पतिवार को सरसों, सोयाबीन, मूंगफली तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल के थोक दाम धराशायी हो गये।

जरुरी जानकारी | तेल पेराई मिलें बेहाल, सभी खाद्य तेलों के भाव धराशायी

नयी दिल्ली, 21 दिसंबर लंबे समय से घाटे का कारोबार जारी रहने और देश की तेल पेराई मिलों के साथ साथ देशी तिलहन किसान, आयातक एवं अन्य अंशधारकों की बदहाल होती हालत के बीच तेल-तिलहन बाजारों में बृहस्पतिवार को सरसों, सोयाबीन, मूंगफली तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल के थोक दाम धराशायी हो गये।

शिकॉगो एक्सचेंज बुधवार रात को गिरावट के साथ बंद हुआ था और फिलहाल यहां गिरावट कायम है। मलेशिया एक्सचेंज में भी गिरावट का रुख है।

बाजार सूत्रों ने कहा कि खाद्य तेलों के थोक दाम में इतनी गिरावट देखने को मिलेगी इसके बारे में किसी ने भी नहीं सोचा था। यह अलग बात है कि ग्राहकों को इन्हीं सस्ते खाद्य तेलों के लिए अपनी जेब पहले की तरह ज्यादा ही ढीली करनी पड़ रही है। थोक दाम घटने का असर खुदरा में क्यों नहीं आ रहा इस ओर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि देश में सस्ता आयात बढ़ने के बाद बेशक उपभोक्ताओं को यथोचित फायदा न मिल रहा हो पर इसका एक स्पष्ट असर देशी तेल पेराई मिलों पर जरूर है कि उनका कामकाज ठप हो चला है। देशी तिलहन किसानों की उपज मंडियों में खप नहीं रही है। खाद्य तेलों के लिए लगभग 55 प्रतिशत निर्भरता वाले इस देश के आयातक, बैंकों का ऋण साख पत्र घुमाने के लिए पाम एवं पामोलीन तेल लागत से कम दाम पर बेच रहे हैं। तेल मिलों से कर्मचारियों की छंटनी हो रही है और जिनके लिए सारी ‘सस्ते आयात’ की कवायद की गई थी, उन उपभोक्ताओं को जरूरत से कहीं अधिक ‘अधिकतम खुदरा मूल्य’ (एमआरपी) रखे जाने की वजह से खाद्य तेल महंगे दाम पर ही खरीदना पड़ रहा है। पूरा का पूरा तेल उद्योग और इसके सभी अंशधारक अजीब उलझन में फंस चुके हैं। इसपर संबंधित अधिकारियों को ध्यान देना चाहिये। तेल संगठन अपने दायित्वों का निर्वहन करने में विफल दिख रहे हैं कि वे तेल उद्योग के समक्ष आई समस्याओं के बारे में सरकार को अवगत नहीं करा पाये।

बृहस्पतिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 5,335-5,385 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,725-6,800 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,700 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,345-2,620 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 9,850 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,685 -1,780 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,685 -1,795 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 9,750 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,600 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 7,700 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,250 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,000 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,100 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 4,970-5,020 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,770-4,820 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,050 रुपये प्रति क्विंटल।

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(The above story first appeared on LatestLY on Dec 21, 2023 07:44 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).