जरुरी जानकारी | लिवाली कमजोर रहने से तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. धन की तंगी की वजह से खाद्य तेलों की लिवाली कमजोर रहने के कारण मंगलवार को मूंगफली तेल-तिलहन को छोड़कर बाकी तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट दर्ज हुई। सरसों, सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल गिरावट के साथ बंद हुए जबकि निचले भाव पर बिकवाली कम होने से मूंगफली तेल- तिलहन के भाव पूर्ववत बने रहे।
नयी दिल्ली, पांच दिसंबर धन की तंगी की वजह से खाद्य तेलों की लिवाली कमजोर रहने के कारण मंगलवार को मूंगफली तेल-तिलहन को छोड़कर बाकी तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट दर्ज हुई। सरसों, सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल गिरावट के साथ बंद हुए जबकि निचले भाव पर बिकवाली कम होने से मूंगफली तेल- तिलहन के भाव पूर्ववत बने रहे।
शिकॉगो एक्सचेंज कल रात 2.5 प्रतिशत नीचे बंद हुआ था और फिलहाल यहां घट-बढ़ चल रही है। मलेशिया एक्सचेंज में गिरावट का रुख है।
बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि आयातित तेलों में बेपड़ता कारोबार जारी रहने तथा धन की कमी का सामना कर रहे तेल आयातकों द्वारा लागत से सस्ते दाम पर बिकवाली करने तथा धन की तंगी के कारण लिवाली कमजोर रहने से खाद्य तेल कीमतों में गिरावट आई है।
सूत्रों ने कहा कि नवंबर में पामतेल का आयात 22 प्रतिशत बढ़ा है। इसके बारे में एक विदेशी ब्रोकर का कहना है कि सस्ता होने की वजह से पामतेल का आयात बढ़ा है। जाड़े में पामतेल के बजाय देश में नरमतेलों (सॉफ्ट आयल) की मांग अधिक होती है क्योंकि ये तेल पामतेल की तरह जाड़े में जमते नहीं हैं। इस मौसम में नरम तेलों (सोयाबीन और सूरजमुखी तेल) की महीने की औसतन मांग लगभग पांच लाख टन की होती है। लेकिन नवंबर में सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का आयात घटकर 2.65 लाख टन रह गया, जो अगस्त, 2023 में 7.20 लाख टन का हुआ था। अब शादी-विवाह और सर्दियों की मांग बढ़ने की स्थिति में नरम तेलों की आपूर्ति कहां से होगी, इस मसले पर ध्यान देना जरूरी होगा। नवंबर में सभी खाद्य तेलों का आयात 11.30 लाख टन का हुआ है लेकिन जाड़े में तो नरम तेलों (सोयाबीन और सूरजमुखी तेल) की अधिक मांग होती है और इन तेलों का आयात कम हुआ है। पाम पामोलीन तेल के आयात कम दिनों में संभव है क्योंकि इसे मलेशिया, इंडोनेशिया से मंगाया जाता है लेकिन ब्राजील, अर्जेन्टीना से आने में सोयाबीन तेल को 40-50 दिन लगते हैं। जिसमें लदान, यात्रा का समय, जहाज खाली करना का समय शामिल है।
सूत्रों ने कहा कि किसानों द्वारा नीचे दाम पर मूंगफली नहीं बेचने से मूंगफली तेल-तिलहन के दाम पूर्वस्तर पर बंद हुए। आयातकों की तरह ही देशी सरसों और बिनौला तेल पेराई मिलों की हालत ख्स्ताहाल है इस ओर ध्यान दिये जाने की जरूरत है।
मंगलवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,590-5,630 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,750-6,825 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,700 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,335-2,610 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 10,375 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,760 -1,855 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,760 -1,870 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,200 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,550 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,000 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,850 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,000 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 8,250 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,015-5,065 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,815-4,865 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,050 रुपये प्रति क्विंटल।
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