नयी दिल्ली, 27 जुलाई लोकसभा में बृहस्पतिवार को ‘अपतट क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) विधेयक, 2023’ पेश किया गय। इसके माध्यम से ‘अपटत क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2002’ में संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है।
निचले सदन में कोयला एवं खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने उक्त विधेयक पेश किया। इस दौरान मणिपुर के मुद्दे पर विपक्षी सदस्य शोर-शराबा कर रहे थे।
जब पीठासीन सभापति किरीट सोलंकी ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी से विधेयक पर बात रखने को कहा, तो उन्होंने अपनी पार्टी के सांसद गौरव गोगोई द्वारा पेश अविश्वास प्रस्ताव का मुद्दा उठाना चाहा।
पीठासीन सभापति ने हालांकि इसे अस्वीकार कर दिया। तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने भी मणिपुर के मुद्दे को उठाने का प्रयास किया।
वहीं, कोयला एवं खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि इस विधेयक को पेश करना संसद के विधायी क्षेत्राधिकार में आता है।
इसके बाद सदन ने ध्वनिमत से ‘अपतट क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) विधेयक’ को पेश करने को स्वीकृति दी।
विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि भारत, नौ तटीय राज्यों और चार संघ राज्य क्षेत्रों की लंबी तटरेखा और वृहद आर्थिक क्षेत्र एवं समुद्री स्थिति में होने के बावजूद अपनी विकास संबंधी जरूरतों के लिए अपतटीय खनिज संसाधनों का दोहन नहीं कर पा रहा है।
वर्तमान कानून में परिचालन अधिकारों को आवंटित करने के लिए एक निष्पक्ष और पारदर्शी तंत्र के विधि ढांचे की कमी और ब्लाकों के आवंटन पर लंबित मुकदमों के गतिरोध के कारण अपतटीय ब्लाकों के आवंटन के पिछले प्रयासों के वांछित परिणाम नहीं मिले। ऐसे में यह विधेयक लाया गया है।
इसमें कहा गया कि इसके माध्यम से प्रतियोगी बोली द्वारा केवल नीलामी के माध्यम से निजी क्षेत्रों के लिए उत्पादन पट्टे को प्रदान करने का उपबंध किया गया है।
इसमें केंद्र सरकार द्वारा आरक्षित किए गए खनिज संबंधी क्षेत्रों में सरकार या सरकारी कंपनी या निगम को प्रतियोगी बोली के बिना संक्रिया अधिकार देने का उपबंध किया गया है।
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