देश की खबरें | ओडिशा : भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान में झुंड में पहुंचते हैं मानसूनी जलीय पक्षी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान ने इस मानसून में एक लाख से अधिक प्रवासी जलीय पक्षियों की मेजबानी की जो प्रवासी पक्षियों की आवक में सात प्रतिशत की वृद्धि है। अभयारण्य मेहमान पक्षियों के लिए ओडिशा में सबसे अनुकूल प्रजनन मैदानों में से एक के रूप में बनकर उभरा है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

केंद्रपाड़ा (ओडिशा), 18 सितंबर भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान ने इस मानसून में एक लाख से अधिक प्रवासी जलीय पक्षियों की मेजबानी की जो प्रवासी पक्षियों की आवक में सात प्रतिशत की वृद्धि है। अभयारण्य मेहमान पक्षियों के लिए ओडिशा में सबसे अनुकूल प्रजनन मैदानों में से एक के रूप में बनकर उभरा है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि केंद्रपाड़ा जिले के वन्यजीव अभयारण्य में इन पक्षियों की प्रजातियों के आगमन में इस बार देरी हुई क्योंकि बारिश का दौर एक समान नहीं था।

अधिकारी ने कहा, ‘‘हालांकि, हमने उद्यान के मैंग्रोव वाले क्षेत्र के साथ मानसूनी पक्षियों का एक विशाल समूह देखा है।’’

गणना करने वालों ने 2021 में 1.09 लाख की तुलना में इस वर्ष 1.16 लाख पक्षियों की गणना की। घोंसला बनाकर प्रवास करने वाले पक्षियों में बगुले, डार्टर और एग्रेट्स प्रमुख हैं । राजनगर मैंग्रोव खंड के अधिकारी ने कहा कि न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप, आदर्श जलवायु परिस्थितियों और नदी प्रणाली ने पक्षियों के आगमन के अनुकूल माहौल बनाया।

भितरकनिका के अधिकारियों ने पिछले हफ्ते मौसमी मानसूनी पक्षियों की गणना के लिए एक अभियान शुरू किया था। दस पक्षी विज्ञानी और वन्यजीव कर्मियों वाली दो टीमें गणना के काम में जुटी थीं।

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि कोर क्षेत्र के अलावा, सतभया और बरुनेई जैसे परिधीय आर्द्रभूमि स्थलों को भी गणना के लिए शामिल किया गया था।

प्रख्यात पक्षी विज्ञानी सलीम अली ने 1981 में भितरकनिका की आकस्मिक यात्रा के दौरान पक्षियों के आवास की खोज की थी।

672 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला यह अभयारण्य खारे पानी के जलीय पौधों मैंग्रोव वनों का एक अनूठा आवास है और इसमें खाड़ियों और नहरों का एक नेटवर्क है। यह देश में लुप्तप्राय खारे पानी के मगरमच्छों का सबसे बड़ा स्थान है।

अधिकारी ने कहा कि पक्षियों के लिए भोजन के पर्याप्त विकल्प हैं क्योंकि यह जगह असंख्य पानी के प्रवेश द्वारों से घिरी हुई है और मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त है।

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