देश की खबरें | आईबीडी से ग्रसित मरीजों की संख्या 2006 के 0.1 फीसदी के मुकाबले 5 फीसदी तक बढ़ी: लांसेट अध्ययन

नयी दिल्ली, चार अगस्त तेलंगाना में किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि ‘इन्फ्लेमेट्री बाउल डिसीज’ (प्रदाहक आंत रोग) से ग्रसित मरीजों की संख्या 2006 के 0.1 फीसदी के मुकाबले बढ़कर पांच फीसदी तक पहुंच गई है। ‘लांसेट’ पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में यह जानकारी दी गई है।

‘एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी’ (एआईजी), हैदराबाद के आईबीडी सेंटर द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि पांच फीसदी से अधिक मरीज आईबीडी से पीड़ित हैं, जिनमें पेट में बार-बार दर्द और दस्त की दीर्घकालिक समस्या शामिल हैं।

शोधकर्ताओं ने मार्च, 2020 से मई, 2022 तक ऐसे लक्षण वाले लगभग 31,000 रोगियों का मूल्यांकन किया, जिसके बाद उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण आबादी के बीच पांच फीसदी का आंकड़ा अपरिवर्तित रहा है।

अध्ययन में कहा गया कि 2006 में इसी संस्थान द्वारा कराए गए ग्रामीण सर्वेक्षण में आईबीडी से पीड़ित मरीजों का आंकड़ा 0.1 फीसदी था।

जापान और कोरिया जैसे एशियाई देशों का हवाला देते हुए शोधकर्ताओं ने कहा कि शहरीकरण इस वृद्धि का एक कारण हो सकता है क्योंकि इन देशों में भी आईबीडी के मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी गई, जहां दोनों देशों ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद तेजी से औद्योगीकरण का अनुभव किया है।

शोधकर्ताओं ने तेलंगाना के रंगारेड्डी, संगारेड्डी और विकाराबाद जिलों में बाह्य रोगी विभाग और विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर में आने वाले मरीजों पर अध्ययन किया।

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