देश की खबरें | उच्च न्यायालय का पुनर्वास योजना के तहत फ्लैटों के आवंटन के लिए परिवारों की याचिका पर नोटिस

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नयी दिल्ली, 19 नवंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने 60 से अधिक परिवारों की उस याचिका पर आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है जिसमें पुनर्वास योजना के तहत फ्लैटों के आवंटन का अनुरोध किया गया है। इन परिवारों की झुग्गियों को गोल डाक खाना से हटा दिया गया था।

न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की एकल पीठ ने याचिका पर आवास और शहरी मामलों और शहरी विकास मंत्रालय, दिल्ली सरकार और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) को नोटिस जारी किये। अदालत ने इस मामले को तीन दिसंबर को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। उस वक्त अदालत इस बात पर विचार करेगी कि क्या जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए निर्देश पारित करने की आवश्यकता है या नहीं।

याचिका में कहा गया है कि इन 61 याचिकाकर्ताओं और उनके परिवारों को 2010 में मध्य दिल्ली के गोल मार्केट से अवैध रूप से निकाल दिया गया था और अधिकारियों के अक्टूबर 2011 के एक आदेश के अंतर्गत वे एक सामुदायिक केंद्र में रह रहे हैं जो एक आश्रय गृह है और उन्हें अभी भी अपने पुनर्वास का इंतजार है।

इसमें कहा गया है कि पुनर्वास के लिए याचिकाकर्ताओं की पात्रता स्थापित की गई थी और दिल्ली सरकार की 2015 की नीति के तहत पुनर्वास के लिए अधिकारियों को पूरा भुगतान किया गया है, जिसके अनुसार पात्र परिवारों को आवंटित अपार्टमेंट पर मालिकाना हक मिलेगा।

याचिका में पिछले साल दिसंबर में आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी एक परिपत्र को चुनौती दी गई थी, जिसके अनुसार पूर्ववर्ती योजनाओं जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) और राजीव आवास योजना (आरएवाई) के तहत निर्मित सभी खाली और निर्माणाधीन मकान शहरी प्रवासियों और गरीबों के लिए किफायती किराये के मकानों के लिए उपलब्ध होंगे।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यद्यपि वे पुनर्वास योजना के एक हिस्से के रूप में डीयूएसआईबी और शहरी विकास मंत्रालय द्वारा फ्लैट आवंटन के हकदार थे, लेकिन उन्हें आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के दिसंबर 2020 के परिपत्र के कारण यह आवंटित नहीं किया गया है।

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