देश की खबरें | एनसीएपी और इसके दायरे से बाहर के शहरों के बीच पीएम2.5 की प्रवृत्तियों में नाममात्र का अंतर: रिपोर्ट

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरमेंट (सीएसई) के एक नये विश्लेषण में पता चला है कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के दायरे में आने वाले और इसकी परिधि में नहीं आने वाले शहरों के बीच पीएम2.5 की संपूर्ण प्रवृत्तियों को लेकर नाममात्र का अंतर है।

नयी दिल्ली, छह सितंबर सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरमेंट (सीएसई) के एक नये विश्लेषण में पता चला है कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के दायरे में आने वाले और इसकी परिधि में नहीं आने वाले शहरों के बीच पीएम2.5 की संपूर्ण प्रवृत्तियों को लेकर नाममात्र का अंतर है।

एनसीएपी राष्ट्रीय स्तर की रणनीति है जिसका मकसद 2024 तक पीएम2.5 और पीएम10 सांद्रता में 20 से 30 प्रतिशत कमी लाना है और इसमें तुलना के लिए आधार वर्ष 2017 होगा।

पीएम2.5 ऐसे कण होते हैं जिनका व्यास सामान्य तौर पर ढाई माइक्रोमीटर या छोटा होता है और ये आसानी से शरीर में चले जाते हैं तथा स्वास्थ्य को इनसे बड़ा खतरा होता है।

यह कार्यक्रम 132 शहरों में चल रहा है जो राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता के निर्दिष्ट मानकों को पूरा नहीं करते।

एनसीएपी के तहत शहर-केंद्रित कार्य योजनाएं तैयार की गयी हैं जिनमें वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क को मजबूत करने, वाहनों तथा उद्योगों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने एवं जन जागरुकता बढ़ाने आदि के लिए उपाय शामिल हैं।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में आने वाले शहर सबसे उन्नत गैर-एनसीएपी शहरों की सूची में सबसे ऊपर हैं। उत्तर भारत के शहरों में सर्वाधिक बदलाव (सकारात्मक या नकारात्मक) देखे गये हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के दायरे में आने वाले और इसकी परिधि में नहीं आने वाले शहरों के बीच पीएम2.5 की संपूर्ण प्रवृत्तियों को लेकर नाममात्र का अंतर है।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘शहरों के दोनों समूह विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में इसी तरह की मिली-जुली प्रवृत्ति दिखाते हैं।’’

सीएसई ने उन शहरों में पीएम2.5 के स्तर का विश्लेषण किया जिसके लिए एनसीएपी के दायरे में आने वाले तथा दायरे में नहीं आने वाले शहरों में प्रवृत्ति को समझाने के लिए आंकड़े उपलब्ध हैं। उसने कहा कि एनसीएपी वाले केवल 43 शहरों में 2019-2021 के लिए पीएम2.5 के पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध हैं जो प्रगति पर नजर रखने के लिए यथोचित प्रवृत्ति के लिहाज से काफी हैं।

कोविड संबंधी लॉकडाउन की वजह से लगभग सभी शहरों में 2020 में पीएम2.5 के स्तर में कमी आई जिसके बाद 2021 में इसमें मामूली बढ़ोतरी हुई।

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