ताजा खबरें | बजट में कोई दर्शन नहीं; दिल्ली के नतीजों से उद्देश्य की पूर्ति हुई: चिदंबरम
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश किए गए आम बजट में कोई दर्शन नहीं था, बल्कि यह राजनीति से प्रेरित था और इसके उद्देश्य की पूर्ति पिछले दिनों दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणामों से हो गई।
नयी दिल्ली, 10 फरवरी कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश किए गए आम बजट में कोई दर्शन नहीं था, बल्कि यह राजनीति से प्रेरित था और इसके उद्देश्य की पूर्ति पिछले दिनों दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणामों से हो गई।
राज्यसभा में वित्त वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट पर चर्चा की शुरुआत करते हुए पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा कि ऐसा नहीं है कि आयकर में कटौती के प्रस्ताव का फायदा केवल मध्यम वर्ग को ही होगा, बल्कि ‘बहुत अमीर’ और ‘सबसे अमीर’ लोगों को भी इससे लाभ होने वाला है।
वित्त मंत्री ने एक फरवरी को पेश बजट में मध्यम वर्ग को बड़ी राहत देते हुए आयकर में छूट सहित कई उपायों का प्रस्ताव किया। कर छूट के तहत आयकरदाताओं को एक साल में 12.75 लाख रुपये (75,000 रुपये की मानक कटौती सहित) तक की कमाई पर कोई आयकर नहीं देना होगा। आयकर छूट की सीमा सात लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये किये जाने से एक करोड़ लोग कर के दायरे से बाहर हो जाएंगे।
चिदंबरम ने कहा, ‘‘बजट के पीछे कोई दर्शन नहीं है। यह स्पष्ट है कि बजट राजनीति से प्रेरित था। मैं इसके बारे में विस्तार से नहीं बता सकता, लेकिन मैं वित्त मंत्री को कुछ दिन पहले अपने एक उद्देश्य को पूरा करने के लिए बधाई देता हूं ... वित्त मंत्री को बधाई।’’
कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य का इशारा स्पष्ट तौर पर दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों की ओर था। इस चुनाव के बीच केंद्रीय बजट में आयकर प्रस्तावों के संबंध में घोषणा की गई थी। चुनाव में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की हार और भारतीय जनता पार्टी की जीत हुई।
चिदंबरम ने कहा कि इस बजट में वित्त मंत्री का मुख्य जोर आयकर में कटौती पर रहा और सभी को पता है कि केवल 3.2 करोड़ व्यक्ति ही आयकर का भुगतान करते हैं।
उन्होंने कहा कि बाकी रिटर्न फाइल करते हैं, लेकिन वे शून्य कर का भुगतान करते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने इस सीमा को सात लाख से बढ़ाकर 12 लाख कर दिया है और यह सभी करदाताओं पर लागू होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मोटा-मोटा अनुमान है कि अगले वर्ष से लगभग 80 से 85 लाख करदाता कर के दायरे से बाहर हो जाएंगे और 2.5 करोड़ लोगों को लाभ होगा। इन 2.5 करोड़ लोगों में न केवल मध्यम वर्ग शामिल है, जिसकी वित्त मंत्री ने पूरे उत्साह से वकालत की थी, बल्कि इसमें 2,27,315 ऐसे व्यक्ति भी शामिल हैं, जिन्होंने एक करोड़ से अधिक का रिटर्न भरा है। इसमें 100 करोड़ से अधिक का रिटर्न भरने वाले 262 व्यक्ति और 500 करोड़ से अधिक का रिटर्न भरने वाले 23 व्यक्ति शामिल हैं।’’
चिदंबरम ने वित्त मंत्री पर केंद्र के पूंजीगत व्यय और राज्यों को अनुदान सहायता में कटौती कर राजकोषीय घाटे में सुधार लाने का दावा करने का भी आरोप लगाया और इसे खराब अर्थशास्त्र करार दिया।
पूर्व वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि मनरेगा की दैनिक मजदूरी बढ़ाई जा सकती थी क्योंकि सबसे गरीब वे हैं जो मनरेगा के काम के लिए जा रहे हैं और साथ ही न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत सभी को वैधानिक न्यूनतम मजदूरी बढ़ाई जा सकती थी और इससे हजारों मजदूरों को लाभ हो सकता था।
सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए, चिदंबरम ने कहा कि 2012 से 2024 के बीच, 12 साल की अवधि में, खाद्य मुद्रास्फीति 6.18 प्रतिशत थी, शिक्षा मुद्रास्फीति 11 प्रतिशत थी, स्वास्थ्य सेवा मुद्रास्फीति 14 प्रतिशत थी।
उन्होंने कहा, ‘‘इसने भारतीय परिवारों को अपंग बना दिया है। घरेलू बचत 25.2 प्रतिशत से गिरकर 18.4 प्रतिशत हो गई है।’’
उन्होंने कहा, 2023 में घरेलू उपभोग सर्वेक्षण के अनुसार, एक ग्रामीण परिवार का औसत मासिक प्रति व्यक्ति व्यय केवल 4,226 रुपये है और शहरी क्षेत्रों में यह केवल 6,996 रुपये है।
चिदंबरम ने यह भी कहा कि वेतनभोगी पुरुष कर्मचारी का वेतन पिछले सात वर्षों में 12,665 रुपये प्रति माह से गिरकर 11,858 रुपये प्रति माह हो गया है जबकि स्व-रोजगार वाले पुरुष श्रमिक का वेतन 9,454 रुपये प्रति माह से घटकर 8,591 रुपये प्रति माह हो गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘क्या स्थिति है? स्थिति यह है कि आय गिर रही है, मजदूरी गिर रही है, सरकारी खर्च वादों के अनुरूप नहीं चल रहे हैं, घरेलू शुद्ध बचत गिर गई है। घरेलू कर्ज बढ़ गया है। यह भारत के निचले तबके के 50 प्रतिशत लोगों की दुर्दशा है। इस बजट में निचले तबके के 50 प्रतिशत लोगों के लिए कुछ नहीं है।’’
उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्यसभा को शीर्ष 50 प्रतिशत के लिए बोलने वाले आधे और निचले 50 प्रतिशत के लिए बोलने वाले आधे में विभाजित नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं निचले 50 प्रतिशत के लिए बोलने में काफी खुश हूं, लेकिन मैं चाहता हूं कि सत्ता पक्ष भी मंत्री को भारत के निचले 50 प्रतिशत की खातिर बोलने के लिए दबाव डाले।’’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने यह भी आरोप लगाया कि उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) और मेक इन इंडिया समेत सरकार की विभिन्न योजनाएं बुरी तरह विफल हैं और ये लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी हैं और ना ही रोजगार पैदा करने में सक्षम रहीं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश के सामने सबसे गंभीर चुनौती बेरोजगारी है।
चिदंबरम ने वित्त मंत्री पर राजकोषीय घाटे को 4.9 प्रतिशत के लक्ष्य से 4.8 प्रतिशत तक सुधारने के लिए पूंजीगत व्यय में कटौती करने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन उन्होंने यह 4.8 प्रतिशत कैसे हासिल कर लिया? उन्होंने केंद्र सरकार के पूंजीगत व्यय में 92,682 करोड़ रुपये की कटौती की। राजस्व व्यय नहीं... उन्होंने पूंजीगत संपत्ति सृजित करने के लिए राज्यों को सहायता अनुदान में 90.887 करोड़ रुपये की कटौती की।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह चालू वर्ष में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा पूंजीगत व्यय में कुल कटौती 1,83,569 करोड़ रुपये होगी। इतनी भारी-भरकम राशि से पूंजीगत व्यय में कटौती करके उन्होंने राजकोषीय घाटे पर 43,785 करोड़ रुपये की बचत की।’’
उन्होंने कहा कि पूंजीगत व्यय में कटौती को समझा जा सकता है, अगर राजकोषीय घाटे की बचत भी उतनी ही बड़ी होती।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन 1,83,000 करोड़ रुपये काटने के बाद, उन्होंने लगभग 44,000 करोड़ रुपये बचाए। क्या यह एक अच्छी नीति है? मुझे नहीं पता। क्या यह अच्छा अर्थशास्त्र है? मैं कहता हूं नहीं। यह अच्छा अर्थशास्त्र नहीं है।’’
पूर्व वित्त मंत्री ने बजट प्रस्तावों में विदेश मंत्रालय के बजट को कम किए जाने को भी रेखांकित किया।
उन्होंने कहा, ‘‘वित्त मंत्री ने इस सभा से विदेश मंत्रालय के लिए 20,517 करोड़ रुपये विनियोजित करने को कहा है। सामान्यत: विदेश मंत्रालय का उल्लेख बजट भाषण में नहीं होता है, लेकिन मैं विदेश मंत्रालय से शुरू करना चाहता हूं।’’
उन्होंने विदेश मंत्रालय के बजट आवंटन में हो रही कमी का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या हम अपनी वैश्विक उपस्थिति को कम कर रहे हैं, या हम दूतावासों को बंद कर रहे हैं या फिर वाणिज्य दूतावास बंद कर रहे हैं?’’
उन्होंने कहा, ‘‘कृपया स्पष्ट करें।’’
चिदंबरम ने पिछले दिनों अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे प्रवासी भारतीयों को निर्वासित किए जाने का मुद्दा भी उठाया और दावा किया कि अब यह स्पष्ट है कि अमेरिका ने भारत को निर्वासन के बारे में सूचित किया था।
चिदंबरम ने कहा, ‘‘उन्होंने भारत को एक सूची दी। विदेश मंत्रालय ने सूची की पुष्टि की कि 104 नाम भारतीय नागरिकों के हैं।’’
उन्होंने कहा कि निर्वासन से कुछ दिन पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की थी।
उन्होंने सवाल किया कि क्या इस मुलाकात के दौरान जयशंकर ने मानक संचालन प्रक्रिया का वह मुद्दा उठाया था, जिसमें निर्वासित किए जा रहे लोगों को हथकड़ी लगाने और पैरों को रस्सियों से बांधने का जिक्र था।
उन्होंने पूछा कि अगर ऐसा था तो भारत ने इसका विरोध क्यों नहीं किया।
चिदंबरम ने यह भी पूछा कि क्या जयशंकर ने अमेरिका को यह प्रस्ताव दिया था कि अपने नागरिकों को वापस लाने के लिए भारत सरकार एक विमान भेजेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘एक और गंभीर मामला है कि अमेरिका ने 483 भारतीयों की सूची तैयार की है, जिनकी पहचान अवैध प्रवासियों के रूप में की गई है। मुझे नहीं पता कि वह उन्हें कब निर्वासित करेंगे। मैं विशेष तौर पर पूछना चाहता हूं कि क्या सरकार भारतीयों को वापस लाने के लिए एक भारतीय विमान भेजेगी।’’
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