देश की खबरें | यदि पानसरे हत्याकांड की जांच एटीएस को सौंपी जाती है तो आपत्ति नहीं : महाराष्ट्र सीआईडी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. वामपंथी नेता गोविंद पानसरे की हत्या के मामले की पिछले सात वर्षों से जांच कर रहे महाराष्ट्र के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय को बताया कि अगर जांच आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) को सौंपी जाती है तो उसे ‘‘कोई आपत्ति नहीं’’ है।

मुंबई, एक अगस्त वामपंथी नेता गोविंद पानसरे की हत्या के मामले की पिछले सात वर्षों से जांच कर रहे महाराष्ट्र के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय को बताया कि अगर जांच आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) को सौंपी जाती है तो उसे ‘‘कोई आपत्ति नहीं’’ है।

एक विशेष टीम द्वारा जांच किए जाने के अनुरोध को लेकर पानसरे के परिवार के सदस्यों द्वारा दायर एक याचिका पर उच्च न्यायालय की ओर आदेश पारित किये जाने के बाद 2015 में सीआईडी ​​के एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था।

पानसरे की फरवरी 2015 में महाराष्ट्र के कोल्हापुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

पानसरे के परिजनों ने सोमवार को उच्च न्यायालय को बताया कि एसआईटी ने पिछले सात वर्षों में मामले में कोई प्रगति नहीं की है। उन्होंने मामले को एटीएस को सौंपने का अनुरोध किया।

एसआईटी के वकील अशोक मुंदरगी ने न्यायमूर्ति रेवती मोहिते-डेरे और न्यायमर्ति शर्मिला देशमुख को बताया कि सीआईडी ​​प्रमुख ने यह कहते हुए एक पत्र प्रस्तुत किया है कि चूंकि एटीएस भी राज्य सरकार की एक जांच एजेंसी है, इसलिए यदि जांच उसे सौंपी जाती है तो उसे कोई आपत्ति नहीं है।

मुंदरगी ने यह भी कहा कि अगर उच्च न्यायालय जांच के हस्तांतरण के खिलाफ फैसला करता है तो राज्य एसआईटी की पूरी संरचना को बदलने को तैयार है। अदालत ने सवाल किया, ‘‘इससे किस उद्देश्य की पूर्ति होगी? आखिरकार, आपका उद्देश्य मामले की जड़ तक जाना होना चाहिए, नहीं?’’

उन्होंने कहा, ‘‘यदि एटीएस इतने वर्षों के बाद जांच फिर से संभालता है, जब कुछ आरोपी पहले से ही हिरासत में हैं, तो जांच नये सिरे से शुरू करनी होगी।’’

इसके बाद न्यायाधीशों ने मुंदरगी को बुधवार तक निर्देश लेने को कहा कि क्या एटीएस का कोई अधिकारी मौजूदा एसआईटी में शामिल हो सकता है। अदालत ने कहा, ‘‘इससे उद्देश्य पूरा होना चाहिए।’’

पानसरे परिवार के वकील अभय नेवागी ने न्यायाधीशों को बताया कि वह एटीएस ही था जिसने पानसरे, तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर, कन्नड़ विद्वान एमएम कलबुर्गी और पत्रकार गौरी लंकेश की हत्याओं की जांच में प्रगति हासिल करते हुए औरंगाबाद हथियार बरामदगी मामले में 2020 में कुछ लोगों को गिरफ्तार किया था।

2020 के मामले में महाराष्ट्र एटीएस ने वैभव राउत, शरद कालस्कर और सुधनवा गोंधलेकर को गिरफ्तार किया था।

कालस्कर ने पूछताछ में खुलासा किया था कि फरार आरोपी सचिन अंदुरे और विनय पवार पानसरे मामले के कथित शूटर थे।

मुंदरगी ने कहा, ‘‘हमारा कहना है कि इन सभी मामलों का आपस में एक संबंध है। वह (नेवागी) हमें और सीबीआई को दोषी ठहरा रहे हैं। पहचाने गए शूटर का पता लगाया जाना बाकी है। देश में लगभग सभी जांच एजेंसियां, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), राष्ट्रीय जांच अभिकरण (एनआईए) और कई राज्य पुलिस उनके पीछे लगी हुई हैं। यह अकेले एटीएस की विफलता नहीं है।’’

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