देश की खबरें | गुजरात के शेरों को दूसरी जगह भेजने की कोई जरूरत नहीं: आईबीसीए महानिदेशक
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. गुजरात में एशियाई शेर प्राकृतिक रूप से भौगोलिक आधार पर एक बड़े क्षेत्र में अलग-अलग रहते हैं और वर्तमान में उन्हें दूसरी जगह भेजने या स्थानांतरित करने की कोई आवश्यकता नहीं है। ‘इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस’ (आईबीसीए) के महानिदेशक एसपी यादव ने यह बात कही।
नयी दिल्ली, 11 सितंबर गुजरात में एशियाई शेर प्राकृतिक रूप से भौगोलिक आधार पर एक बड़े क्षेत्र में अलग-अलग रहते हैं और वर्तमान में उन्हें दूसरी जगह भेजने या स्थानांतरित करने की कोई आवश्यकता नहीं है। ‘इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस’ (आईबीसीए) के महानिदेशक एसपी यादव ने यह बात कही।
पूर्व में ‘प्रोजेक्ट लॉयन’ और ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ दोनों का नेतृत्व कर चुके यादव ने यहां पीटीआई मुख्यालय में एजेंसी के संपादकों से बातचीत में कहा कि एशियाई शेरों की आबादी एक ही क्षेत्र तक सीमित नहीं है, इसलिए उनका स्थानांतरण अनावश्यक है।
उनके अनुसार, यह सच है कि अगर कोई महामारी आती है तो यह विनाशकारी हो सकती है। मसलन तंजानिया में इस तरह के हालात में 90 प्रतिशत शेर मारे गए।
राज्य में किसी महामारी या प्राकृतिक आपदा से बड़ी संख्या में एशियाई शेरों के मारे जाने की आशंका के बारे में यादव ने कहा, ‘‘हालांकि, महामारी तब फैलती है जब आबादी का कोई भौगोलिक पृथक्करण नहीं होता है। गुजरात का यह क्षेत्र 15 हजार वर्ग किलोमीटर से 30 हजार वर्ग किलोमीटर तक विस्तारित हो गया है, इसलिए मानव हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।’’
यादव ने उदाहरण देते हुए कहा कि एक नर शेर स्वाभाविक रूप से गिर से बरदा वन्यजीव अभयारण्य में पहुंच गया। उसके बाद एक मादा भी वहां पहुंची और उसके बाद से वहां शावक पैदा हुए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर शेर एक क्षेत्र तक ही सीमित होते, तो यह चिंता का विषय होता। लेकिन अब, ऐसा कोई सवाल ही नहीं उठता। प्रकृति इस बात का ख्याल रख रही है। मेरा मानना है कि फिलहाल (स्थानांतरण की) कोई जरूरत नहीं है।’’
भारत में एशियाई शेरों का एक मात्र पर्यावास गुजरात में है और कुछ विशेषज्ञ लंबे समय से इस बात की वकालत कर रहे हैं कि कुछ शेरों को देश के अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाए ताकि एक ही जगह रहने से बीमारियों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को कम किया जा सके।
उच्चतम न्यायालय ने 2013 में सरकार को निर्देश दिया था कि वह छह महीने के भीतर गुजरात से एशियाई शेरों को पड़ोसी मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में स्थानांतरित करे। हालांकि, लगभग एक दशक बाद, अफ्रीका से चीतों को कूनो में लाया गया।
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