देश की खबरें | वकील के रूप में नामांकित करने के लिए 600 रुपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जा सकता: न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि देशभर में विधि स्नातकों को वकील के रूप में नामांकित करने के लिए 600 रुपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जा सकता। शीर्ष अदालत ने राज्य बार निकायों द्वारा लिये जा रहे ‘अत्यधिक’ शुल्क को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

नयी दिल्ली, 22 अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि देशभर में विधि स्नातकों को वकील के रूप में नामांकित करने के लिए 600 रुपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जा सकता। शीर्ष अदालत ने राज्य बार निकायों द्वारा लिये जा रहे ‘अत्यधिक’ शुल्क को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने 10 याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखते हुए अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 24 का उल्लेख किया और कहा कि वकील के रूप में नामांकित होने के लिए विधि स्नातक से लिया जाने वाला शुल्क 600 रुपये है और केवल संसद ही कानून में संशोधन कर इसे बढ़ा सकती है।

पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा सहित दोनों पक्षों के वकीलों को सुनने के बाद कहा, ‘‘600 रुपये से अधिक कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता है... यदि आप नामांकन शुल्क बढ़ाना चाहते हैं, तो इसे (नामांकन शुल्क) बढ़ा सकती है।’’

बीसीआई अध्यक्ष ने अदालत को बताया, ‘‘अब हम 15,000 रुपये नामांकन शुल्क के बारे में बात कर रहे हैं। बिहार में, हम कैंसर या किडनी रोग के लिए वकीलों को प्रति व्यक्ति के हिसाब से 25,000 रुपये का भुगतान करते थे।’’

शीर्ष अदालत ने 10 अप्रैल को याचिकाओं पर केंद्र, बीसीआई और अन्य राज्य बार निकायों को नोटिस जारी किया था और कहा था कि उन्होंने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है।

नोटिस जारी करते समय न्यायालय ने कहा था, ‘‘उदाहरण के लिए, याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि ओडिशा में नामांकन शुल्क 42,100 रुपये, गुजरात में 25,000 रुपये, उत्तराखंड में 23,600 रुपये, झारखंड में 21,460 रुपये और केरल में 20,050 रुपये है।’’

अदालत ने यह भी कहा था कि उच्च शुल्क प्रभावी रूप से वकील बनने के आकांक्षी उन युवाओं को नामांकन से वंचित कर देता है, जिनके पास जरूरी संसाधन नहीं हैं।

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