नयी दिल्ली, 12 जून दिल्ली की एक अदालत ने वीडियोकॉन समूह द्वारा कथित तौर पर 60 हजार करोड़ रुपये के धनशोधन मामले में उद्यमी सचिन देव दुग्गल के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट को रद्द करने से इनकार कर दिया।
उल्लेखनीय है कि वीडियोकॉन समूह ने उक्त राशि बैंकों के कंसोर्टियम (समूह) से मोजाम्बिक, ब्राजील, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और पूर्वी तिमोर में तेल व गैस परिसंपत्तियों को विकसित करने के लिए ली थी।
विशेष न्यायाधीश राजेश कुमार गोयल ने दुग्गल के उस आवेदन को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने अदालत द्वारा 10 फरवरी 2023 को जारी गैर जमानती वारंट को रद्द करने का अनुरोध किया था।
दुग्गल ने दावा किया था कि वह इस मामले में महज गवाह हैं।
दुग्गल के आवेदन को खारिज करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे व्यक्ति के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने को लेकर कोई कानूनी बाधा नहीं है जो जांच एजेंसी द्वारा बार-बार नोटिस दिए जाने या समन किए जाने के बाद भी उपस्थित होने में असफल रहा हो, भले ही वह गवाह क्यों न हो।
न्यायाधीश ने नौ जून को जारी आदेश में कहा, ‘‘ यह अदालत यह समझ नहीं पा रही है कि कैसे किसी व्यक्ति की उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए अगर वह बार-बार समन के बाद भी पेश नहीं हो रहा हो। अंतत: एक ही विकल्प बचता है कि दंडात्मक प्रक्रिया की ओर बढ़ा जाए ताकि धनशोधन जैसे गंभीर मामले से जुड़ी जांच के लिए उस व्यक्ति की उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए।’’
अदालत ने कहा कि इस समय उचित नहीं है कि अंतिम फैसला किया जाए और निष्कर्ष निकाला जाए कि आवेदनकर्ता केवल गवाह है क्योंकि पूरे मामले का अन्वेषण जांच एजेंसी द्वारा किया जाना है।
अदालत ने कहा कि अगर अपराध में संलिप्त होने की परिस्थिति और सबूत हैं तो घंटे भर में रुख बदल सकता है।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ कई बार व्यक्ति जांच एजेंसी से इस शिकायत के साथ संपर्क कर सकता है कि संज्ञेय अपराध हुआ है। उस समय प्रथमदृष्टया वह शिकायतकर्ता और गवाह होगा लेकिन एक-दो दिन बाद इस बात की संभावना है कि वह मुख्य आरोपी हो सकता है। यह सब जांच का विषय है।’’
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