देश की खबरें | विधायक नरेश बाल्यान की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई की कोई जल्दी नहीं: पुलिस ने अदालत से कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली पुलिस ने बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मकोका मामले में अंतरिम जमानत के लिए आम आदमी पार्टी (आप) नेता एवं उत्तम नगर से विधायक नरेश बाल्यान की याचिका पर सुनवाई की कोई जल्दी नहीं है।

नयी दिल्ली, 23 जनवरी दिल्ली पुलिस ने बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मकोका मामले में अंतरिम जमानत के लिए आम आदमी पार्टी (आप) नेता एवं उत्तम नगर से विधायक नरेश बाल्यान की याचिका पर सुनवाई की कोई जल्दी नहीं है।

न्यायमूर्ति विकास महाजन ने कहा कि क्योंकि मामले में अंतरिम जमानत के लिए भी ‘‘दोहरी शर्तों’’ की पड़ताल करने की आवश्यकता है, इसलिए उनकी नियमित जमानत पर फैसला किया जाना चाहिए।

अदालत ने कहा, ‘‘जब अंतरिम जमानत के लिए भी दोहरी शर्तें पूरी करनी होंगी, तो हमें इस पर अंतिम रूप से विचार करना चाहिए।’’

अदालत ने सुनवाई 28 जनवरी के लिए स्थगित कर दी।

पुलिस का पक्ष रखने के लिए पेश हुए वकील ने कहा कि दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन को अंतरिम राहत देने के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के विभाजित फैसले के मद्देनजर बाल्यान की याचिका पर फैसला करने की ‘‘कोई जल्दी’’ नहीं है।

बाल्यान के वकील ने फिर भी अंतरिम जमानत का अनुरोध करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ मकोका के तहत कोई अपराध नहीं बनता।

विधायक ने इस आधार पर अंतरिम जमानत मांगी थी कि उनकी पत्नी पांच फरवरी को होने वाला विधानसभा चुनाव लड़ रही हैं।

बाल्यान की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि विधायक के खिलाफ कपिल सांगवान के कथित गिरोह से उनका संबंध साबित करने वाला कोई सबूत नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस गिरोह से बिल्कुल भी जुड़ा नहीं हूं। मैं ही उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करा रहा हूं।’’

वरिष्ठ वकील ने कहा कि बाल्यान के खिलाफ कथित इकबालिया बयान कानून में स्वीकार्य नहीं हैं और उन्हें इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि कथित जबरन वसूली के एक मामले में निचली अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी।

पुलिस के वकील ने कहा कि याचिका का विरोध करने के लिए उनकी दलीलों में ‘‘कुछ समय लगेगा’’।

बाल्यान के वकील ने पहले दलील दी थी कि उनके खिलाफ ‘‘कोई सबूत नहीं है’’ और मामला ‘‘पूरी तरह से आधारहीन’’ है।

वकील ने दलील दी कि प्राथमिकी में बाल्यान का नाम तक नहीं है और विधायक ने खुद ही अपराध के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

दिल्ली की एक अदालत ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत दर्ज एक मामले में बाल्यान को जमानत देने से 15 जनवरी को इनकार कर दिया था।

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