नयी दिल्ली, 24 अगस्त तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) के अनुसंधानकर्ता समुद्री सूक्ष्म शैवाल से जैव ईंधन के उत्पादन पर काम कर रहे हैं।
यह जानकारी सोमवार को एक बयान में दी गई।
इसमें कहा गया कि एनआईटी से टी मतिमणि ने नवीकरणीय और सतत स्रोतों से वैकल्पिक ईंधन की खोज शुरू की।
बयान में कहा गया कि हालांकि, हाल में विभिन्न प्रकार के जैव ईंधन की खोज हुई है, लेकिन इस ईंधन के उत्पादन के लिए सूक्ष्म शैवाल के इस्तेमाल पर इसलिए विचार किया गया क्योंकि अन्य जैव ईंधन सामग्री के मुकाबले इसके कई तरह के लाभ होते हैं और दीर्घकालिक ईंधन के इस मार्ग ने मतिमणि को इस कार्य के लिए प्रेरित किया।
मतिमणि और उनकी टीम के इस कार्य से जुड़े अनुसंधान के बारे में पत्रिका ‘केमोस्फेयर’ में रिपोर्ट प्रकाशित हुई है।
अनुसंधानकर्ताओं ने जैव ईंधन के उत्पादन के लिए तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों से समुद्री सूक्ष्म शैवाल प्रजातियों के संबंधित प्रमुख तत्वों-पिकोक्लोरम एसपी, सेनेडेस्मस एसपी, क्लोरेला एसपी को पृथक करने में सफलता अर्जित की है।
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