देश की खबरें | एनआईआरटी बीसीजी की बूस्टर खुराक लगाने के लिए अध्ययन पर विचार कर रहा है

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चेन्नई, सात जुलाई राष्ट्रीय यक्षमा अनुसंधान संस्थान (एनआईटीआरटी) ऐसे बच्चों और किशोरों को बीसीजी का टीका फिर से लगाने के लिए अध्ययन शुरू करने पर विचार कर रहा है जिनके घर में लोग तपेदिक (टीबी) से पीड़ित हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि बीसीजी की बूस्टर खुराक उनमें बीमारी को रोकने में मदद करेगी या नहीं।

टीबी का क्लीनिकल तौर पर एकमात्र स्वीकृत टीका ‘बेसिल कैलमेट गुएरिन’ है जिसे बच्चे को जन्म के समय लगाया जाता है।

आईसीएमआर के एनआईआरटी में निदेशक डॉ पद्मा प्रियदर्शी ने कहा कि सब नवजातों में बीसीजी टीके की प्रभावकारिता से वाकिफ हैं और यह बच्चे में मेनिन्जाइटिस और प्रसारित टीबी के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि बीसीजी टीकाकरण पर काफी अनिश्चितता है। उन्होंने कहा कि यह ज्ञात है कि बीसीजी पुन:टीकाकरण प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ाता है, लेकिन यह अभी तक स्थापित नहीं हुआ है कि क्या बीसीजी टीकाकरण घर में टीबी से पीड़ित शख्स से यह बीमारी लगने में रोकने में मदद कर सकता है या नहीं।

डॉ प्रियदर्शनी ने कहा, “इस अध्ययन का प्राथमिक मकसद समान आयु वर्ग के लोगों में घर में संक्रमित व्यक्ति से तपेदिक के संचरण को रोकने में मुंह से ली जाने वाली कीमोप्रोफिलैक्सिस की तुलना में बीसीजी के पुन: टीकाकरण की प्रभावकारिता का आकलन करना है।”

इस अध्ययन के लिए भारत के सात स्थानों पर 9200 बच्चों को शामिल किया जाएगा।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने वयस्कों के बीसीजी पुन: टीकाकरण पर स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ एक दौर की बातचीत की है, और एक और बैठक अगले हफ्ते होनी है।

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