देश की खबरें | एनआईए अदालत ने वहीद पारा को ‘आतंकवाद से संबंधित’ मामले में जमानत दी
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जम्मू, नौ जनवरी पीडीपी की युवा इकाई के अध्यक्ष वहीद पारा को शनिवार को यहां राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की एक अदालत ने जमानत दे दी।
पारा को हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों के साथ कथित संबंधों को लेकर डेढ़ महीने तक जेल में रहने के बाद जमानत मिली है।
हालांकि, रिहा होने के बाद जिला जेल से बाहर आए पारा को एक सुरक्षा एजेंसी के लोग अपने साथ ले गए, लेकिन तत्काल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वह किसी अन्य मामले में वांछित हैं या पूछताछ के लिए हिरासत में लिए गए हैं।
पारा की जमानत को एनआईए द्वारा उच्च न्यायालय में चुनौती दिए जाने की संभावना है।
पीडीपी अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पारा को ‘फिर से हिरासत में लिए जाने’ पर चिंता जताई और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से उनकी सुरक्षित रिहाई के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।
महबूबा ने ट्वीट किया, ‘‘एनआईए अदालत द्वारा अदालती कार्यवाही के बाद वहीद पारा को जमानत दिए जाने के बावजूद अब उन्हें जम्मू में सीआईके ने हिरासत में लिया है। किस कानून के तहत और किस अपराध में उन्हें गिरफ्तार किया गया है? यह अदालत की खुली अवमानना है। मनोज सिन्हा जी से आग्रह है कि वह हस्तक्षेप करें, जिससे कि न्याय सुनिश्चित हो।’’
अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में दक्षिण कश्मीर के अपने गृह नगर पुलवामा जिले से जिला विकास परिषद (डीडीसी) चुनाव जीतने वाले पारा को एनआईए अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें एक लाख रुपये की जमानत राशि और इतनी ही राशि के निजी मुचलके पर जमानत दे दी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुनित गुप्ता ने पारा को अदालत की पूर्व अनुमति के बिना केंद्रशासित प्रदेश से बाहर न जाने तथा पासपोर्ट जमा करने जैसी कई शर्तों के साथ जमानत दी।
एनआईए ने पारा को पिछले साल 25 नवंबर को गिरफ्तार किया था। उनकी गिरफ्तारी गुपकर घोषणा पत्र गठबंधन (पीएजीडी) के उम्मीदवार के तौर पर उनके द्वारा नामांकन पत्र दाखिल किए जाने के कुछ दिन बाद हुई थी।
एनआईए ने कहा था कि पारा को हिजबुल मुजाहिदीन की मदद संबंधी नवीद बाबू-दविंदर सिंह मामले में गिरफ्तार किया गया।
पीडीपी ने इस आरोप से इनकार किया था और गिरफ्तारी को ‘‘राजनीति से प्रेरित’’ करार दिया था।
पारा को पुलवामा और पास के शोपियां जिले में तब युवाओं के लिए मुख्यधारा की राजनीति में शामिल होने के वास्ते प्रमुख प्रेरक माना जाता था, जब आतंकवाद वहां फिर से अपना सिर उठा रहा था।
साल 2016 से 2018 तक जम्मू कश्मीर खेल परिषद के सचिव के रूप में पारा ने पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य के हिस्सों में खेलों के आयोजन में प्रमुख भूमिका निभाई थी, जिसमें लद्दाख क्षेत्र भी शामिल था।
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