नयी दिल्ली, 28 जुलाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने मंगलवार को कहा कि वह मेघालय में कोयला की ढुलाई के संबंध में एक कमेटी की सिफारिशों को मंजूरी नहीं दे सकता क्योंकि यह उच्चतम न्यायालय के फैसले के विरूद्ध होगा। कमेटी ने मेघालय में कोयला भंडार के मालिकों को कोयला की ढुलाई करने देने की सिफारिश की थी ।
गौहाटी उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी डी अग्रवाल की अध्यक्षता वाली कमेटी ने सिफारिश की है कि खनन एवं भूविज्ञान विभाग कोयला भंडार मालिकों को अपने-अपने संबंधित जिलों में ट्रांजिट पास जारी होने की तारीख से 15 दिनों के लिए कोयला की ढुलाई की अनुमति दे।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए के गोयल के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ कमेटी की सिफारिशों को मंजूरी नहीं दी जा सकती ।
हरित अधिकरण ने कहा कि शीर्ष न्यायायालय के फैसले में कहा गया है कि रिकार्ड के मुताबिक कोयला मालिकों की पहचान पहले ही हो चुकी है और कोयला खदान सौंपने की प्रक्रिया राज्य सरकार को शुरू करना है।
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एनजीटी ने कहा कि अवैज्ञानिक तरीके से निकाले गए कोयला की मात्रा 23,25,663.54 मीट्रिक टन है । यह कोयला कोल इंडिया के हवाले करने को कहा गया था ।
पीठ ने कहा कि कमेटी समाधान की योजना पर गौर करने समेत अपने कामकाज को जारी रख सकती है और 31 दिसंबर को अपनी स्थिति रिपोर्ट पेश करे ।
एनजीटी ने मेघालय में पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर गौर करने करने के लिए अगस्त 2018 में एक कमेटी का गठन किया था।
उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल खान और खनिज (विकास और नियमन) कानून के संबंधित सांविधिक ढांचे के तहत मेघालय में कोयला खान के संचालन का रास्ता प्रशस्त किया था। एनजीटी ने 2014 में मेघालय में खनन पर प्रतिबंध लगा दिया था ।
मेघालय में कोयला खनन पर प्रतिबंध का अनुरोध करने वाली एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कमेटी का गठन किया गया था ।
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