देश की खबरें | एनजीटी ने मेघालय में अवैज्ञानिक खनन रोकने के लिए एक समिति बनायी
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नयी दिल्ली, 15 मार्च मेघालय में पाबंदी के बाद भी बड़े पैमाने पर रैट होल (अवैध एवं गलत तरीके से) खनन होने का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने राज्य में अवैज्ञानिक और अनियमित खनन रोकने के लिए सोमवार को 12 सदस्यों वाली एक निगरानी समिति बनायी ।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि जन विश्वास सिद्धांत के तहत राज्य के अधिकारी दुर्लभ प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरण एवं जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए काम करने को बाध्य हैं।
एनजीटी ने कहा कि चूंकि उसकी निगरानी हमेशा जारी नहीं रह सकती हैं, ऐसे में कार्यकारी अधकारियों द्वारा आगे काम करने और उन पर पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के अवर सचिव की अगुवाई में 12 सदस्यीय समिति की निगरानी की जरुरत है।
उसने कहा, ‘‘ पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के शिलांग के क्षेत्रीय अधिकारी समिति के कामकाज एवं रोजमर्रा के मुद्दों से निपटने में समन्वय कायम करने के लिए सदस्य सचिव होंगे।’’
पीठ ने कहा, ‘‘ समिति महीने में एक बार अपनी बैठक कर सकती है, वह स्थिति का जायजा ले सकती है और भावी कार्ययोजना बना सकती है। उसपर अवैज्ञानिक एवं अनियमित खनन रोकने एवं पहले से खनन कर निकाली गयी सामग्री के निपटान एवं अन्य घटना संबंधी मुद्दों में उच्चतम न्यायालय एवं इस अधिकरण के अगले आदेशों का क्रियान्वयन करने का जिम्मा होगा।’’
हरित पीठ ने पूरे मेघालय में खनन पर पाबंदी लगा रखी है लेकिन उसने खनन कर खुले में रखे गये कोयले की कुछ शर्तों के साथ ढुलाई की भी अनुमति दे रखी है।
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