देश की खबरें | अंतिम संस्कार के वैकल्पिक तरीके अपनाने के अनुरोध वाली याचिका पर एनजीटी का सुनवायी से इनकार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवायी से इनकार कर दिया जिसमें वायु प्रदूषण कम करने के साथ ही कोविड-19 के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए अंतिम संस्कार के वैकल्पिक तरीके स्थापित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

नयी दिल्ली, 17 जुलाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवायी से इनकार कर दिया जिसमें वायु प्रदूषण कम करने के साथ ही कोविड-19 के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए अंतिम संस्कार के वैकल्पिक तरीके स्थापित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

हरित अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल के नेतृत्व वाली एक पीठ ने उस याचिका पर सुनवायी से इनकार कर दिया जिसमें राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सभी श्मशानों में लकड़ी के माध्यम से होने वाले अंतिम संस्कारों में से एक तिहायी को निर्धारित अवधि में वैकल्पिक तरीकों से बदलने का अनुरोध किया गया था।

यह भी पढ़े | केरल: सोने की तस्करी मामले में कस्टम विभाग ने दो और लोगों, अबुबकर और अब्दुल हमीद को किया गिरफ्तार: 17 जुलाई 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

पीठ ने कहा, ‘‘हमें यह मुद्दा राष्ट्रीय हरित अधिकरण, अधिनियम, 2010 की धारा 14 और 15 के तहत पर्यावरण के एक महत्वपूर्ण सवाल के तौर पर उठाया गया मुद्दा नहीं लगता।’’

पीठ ने हालांकि कहा कि यह आदेश अर्जीकर्ता को इस मुद्दे को उचित प्राधिकारियों के समक्ष उठाने से नहीं रोकेगा जो इस मामले पर व्यवहार्यता के अनुसार विचार कर सकते हैं।

यह भी पढ़े | महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा- सुशांत सिंह राजपूत मामले की CBI जांच की जरूरत नहीं, मुंबई पुलिस इस प्रकरण की जांच में सक्षम.

अधिकरण दिल्ली निवासी प्रमोद कुमार भाटिया एवं अन्य की ओर से दायर अर्जी पर सुनवायी कर रहा था जिसमें वायु प्रदूषण कम करने के लिए अंतिम संस्कार करने के वैकल्पिक तरीकों के लिए अनुरोध किया गया था।

अधिवक्ता राहुल चौधरी के जरिये दायर अर्जी में कहा गया था कि पिछले कुछ वर्षों में प्रकाशित कई रिपोर्टों में यह बात सामने आयी है कि लकड़ी आधारित अंतिम संस्कार से काफी वायु प्रदूषण होता है।

याचिका में कहा गया कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर अंतिम संस्कार के वैकल्पिक तरीकों का महत्व बढ़ जाता है।

याचिका में यह भी कहा गया कि भारत में कोविड-19 से होने वाली मौतों के मामले में ‘मेडिको-लीगल ऑटोप्सी’ के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा जारी मानक दिशानिर्देशों के अनुसार यह अनुशंसा की जाती है कि ‘‘जहां भी संभव हो शव का अंतिम संस्कार किसी विद्युत शवदाह गृह में किया जाना चाहिए।’’

याचिका में कहा गया है कि चूंकि विद्युत शवदाह गृह बंद होता है इसलिए इसे कोविड-19 रोगियों के दाह संस्कार का सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\