देश की खबरें | एनजीओ ने उच्चतम न्यायालय के फैसले पर टिप्पणी के लिए ममता बनर्जी को भेजा अवमानना नोटिस

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने पश्चिम बंगाल में 25,000 से अधिक स्कूली नौकरियों को रद्द करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले पर टिप्पणी के लिए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अवमानना ​​नोटिस भेजा है। एनजीओ का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

कोलकाता, 11 अप्रैल एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने पश्चिम बंगाल में 25,000 से अधिक स्कूली नौकरियों को रद्द करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले पर टिप्पणी के लिए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अवमानना ​​नोटिस भेजा है। एनजीओ का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

वकील ने आरोप लगाया कि बनर्जी ने राज्य में 25,000 से अधिक स्कूली नौकरियों को रद्द करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का अपमान किया है।

नोटिस में दावा किया गया है कि सात अप्रैल को कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान बनर्जी ने कुछ ऐसे बयान दिए जो सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की अवमानना है।

उच्चतम न्यायालय के वकील सिद्धार्थ दत्ता ने कहा कि वह बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के नवनगर स्थित एनजीओ 'आत्मदीप' का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

वकील ने नोटिस की एक प्रति 'पीटीआई' को उपलब्ध कराई है।

नोटिस में कहा गया है कि ममता बनर्जी के बयान उच्चतम न्यायालय के तीन अप्रैल के फैसले का अपमान हैं, जिसमें 25,000 से ज्यादा शिक्षकों और गैर-शिक्षकों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया था।

नोटिस में कहा गया है, "आपसे सार्वजनिक रूप से या अन्य किसी भी तरह से ऐसा बयान नहीं देने का आग्रह किया जाता है, जिससे किसी के मन में यह धारणा या आशा पैदा हो कि सर्वोच्च न्यायालय के तीन अप्रैल, 2025 के निर्णय और निर्देशों का क्रियान्वयन नहीं किया जाएगा।"

याचिका में सात अप्रैल को दिए गए बयानों के लिए उच्चतम न्यायालय से बिना शर्त माफी मांगने की भी मांग की गई।

नोटिस में दत्ता ने कहा कि यदि इसका पालन नहीं किया गया तो उनके मुवक्किल मुख्यमंत्री के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे।

शीर्ष अदालत ने तीन अप्रैल को 2016 के स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) भर्ती अभियान के माध्यम से नियुक्त 25,753 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती को रद्द करने वाले कलकत्ता उच्च न्यायालय के 2024 के फैसले को बरकरार रखा था।

सात अप्रैल को, बनर्जी ने फैसले के बाद अपनी नौकरियां खोने वाले योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों की रक्षा करने का संकल्प लिया था।

उन्होंने कहा था कि राज्य प्रशासन पहले सर्वोच्च न्यायालय से स्पष्टीकरण मांगेगा और यदि आवश्यक हो, तो पात्र उम्मीदवारों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए समीक्षा याचिका दायर करेगा।

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