देश की खबरें | नयी शिक्षा नीति ‘शिक्षा के बाजार’ बनाएगी, गरीबों को अच्छी शिक्षा से वंचित करेगी: भाकपा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भाकपा ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि सरकार की नई शिक्षा नीति (एनईपी) शिक्षा तक सबकी पहुंच की अवधारणा के अनुरूप नहीं है और यह ‘‘शिक्षा के बाजार’’ बनाने पर केंद्रित है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 30 जुलाई भाकपा ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि सरकार की नई शिक्षा नीति (एनईपी) शिक्षा तक सबकी पहुंच की अवधारणा के अनुरूप नहीं है और यह ‘‘शिक्षा के बाजार’’ बनाने पर केंद्रित है।

वाम दल ने एक बयान में कहा कि राजग सरकार ने नई शिक्षा नीति (एनईपी) को मंजूरी दे दी है। इस नीति के जरिए मौलिक बदलाव किए गए हैं, जिनसे शिक्षा के बाजार पैदा होंगे। यह नीति सरकारी स्कूलों के जरिए शिक्षा तक सभी की पहुंच सुनिश्चित करने की अवधारणा से दूर है और समाज के वंचित तबकों एवं गरीबों को अच्छी शिक्षा मुहैया कराने के अनुरूप नहीं है।

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उसने कहा, ‘‘सरकार द्वारा वित्त पोषित शिक्षा के अभाव वाली यह नीति, आज मौजूद थोड़े-बहुत सामाजिक न्याय को भी समाप्त कर देगी।’’

भाकपा ने आरोप लगाया कि सरकार ने नीति बनाने की प्रक्रिया में संसद को नजरअंदाज किया और संघवाद को कमजोर किया।

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उसने कहा कि एनईपी ‘‘पूर्ण निजीकरण, वाणिज्यीकरण एवं अत्यधिक केंद्रीकरण’’ की कोशिश है और इससे फीस बढ़ेगी, विश्वविद्यालयों की स्वायत्ता पर हमला होगा और अध्यापन में कोई स्थायी नौकरी नहीं रहेगी।

हालांकि, पार्टी ने कहा कि एनईपी का एकमात्र सकारात्मक पहलू यह है कि शिक्षा के अधिकार के तहत तीन साल से 18 साल की आयु तक शिक्षा दी जाएगी, जो सीमा पहले 14 वर्ष की आयु तक थी।

पार्टी ने इस नीति की सफलता को लेकर भी संशय जताया।

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