विदेश की खबरें | नेपाल की प्रतिनिधि सभा ने पांच अध्यादेशों को मंजूरी दी

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श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

काठमांडू, पांच मार्च नेपाल की प्रतिनिधि सभा ने सरकार द्वारा पेश पांच अध्यादेशों को बुधवार को मंजूरी दे दी। वहीं, भूमि संबंधी अध्यादेश बुधवार को सदन में पेश नहीं किया गया, क्योंकि दो गठबंधन सहयोगियों ने इसके कुछ प्रावधानों का विरोध किया है।

सुशासन, वित्तीय प्रक्रिया, निजीकरण, निवेश प्रोत्साहन और सहकारी समितियों से संबंधित अध्यादेशों को सदन की मंजूरी मिल गई।

राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने 13 जनवरी को सुशासन, वित्तीय प्रक्रिया, निजीकरण और वित्तीय प्रक्रिया पर चार अध्यादेश जारी किए थे; भूमि संबंधी अध्यादेश 15 जनवरी को जारी किया गया था और सहकारिता संबंधी अध्यादेश 27 जनवरी को लाया गया था।

हालांकि, मधेशी दलों ने भूमि संबंधी अध्यादेश के कुछ प्रावधानों का विरोध किया था, जिसके मद्देनजर गठबंधन सहयोगियों ने इसे आगे न बढ़ाने का फैसला किया। इसलिए सरकार ने बुधवार को इसे प्रतिनिधि सभा में पेश नहीं किया।

इससे पहले, मंगलवार को संसद की कार्य मंत्रणा समिति की बैठक के बाद नेपाली कांग्रेस के मुख्य सचेतक श्याम घिमिरे ने कहा था, ‘‘एक को छोड़कर सभी अध्यादेशों पर बुधवार को मतदान होगा।’’

‘काठमांडू पोस्ट’ ने घिमिरे के हवाले से प्रकाशित खबर में कहा, ‘‘भूमि संबंधी अध्यादेश पर निर्णय सत्तारूढ़ गठबंधन में पार्टियों के बीच आगे की चर्चा के बाद लिया जाएगा।’’

इससे पहले, रविवार शाम को सत्तारूढ़ गठबंधन की बैठक में अध्यादेश को स्थगित रखने का निर्णय लिया गया था।

‘काठमांडू पोस्ट’ ने प्रधानमंत्री के मुख्य सलाहकार बिष्णु रिमल के हवाले से दी खबर में कहा, ‘‘गठबंधन इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि भूमि अधिनियम के कुछ प्रावधानों पर जेएसपी-नेपाल और एलएसपी की आपत्तियों के बाद इसमें संशोधन के लिए (अध्यादेश पर) आगे चर्चा की आवश्यकता है।’’

भूमि संबंधी अध्यादेश का गठबंधन में शामिल दो दलों-जनता समाजवादी पार्टी नेपाल (जेएसपी-नेपाल) और लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी (एलएसपी) ने विरोध करते हुए दावा किया था कि यह “भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाता है” और घोषणा की थी कि वे संसद के किसी भी सदन में सरकार का समर्थन नहीं करेंगे।

जेएसपी नेशनल असेंबली (उच्च सदन) में निर्णायक भूमिका में है, क्योंकि वर्तमान में नेशनल असेंबली में सत्तारूढ़ गठबंधन की ताकत 27 सीट है, जबकि विपक्षी दलों के पास 26 सीट हैं। इसलिए, जेएसपी-नेपाल के तीन वोट निर्णायक कारक हो सकते हैं।

उच्च सदन में कुल 59 सीट हैं; किसी भी अध्यादेश को बहुमत से पारित करने के लिए 30 मतों की आवश्यकता होती है।

अध्यादेशों को विधेयक द्वारा प्रतिस्थापित किए जाने से पहले उन्हें नेशनल असेंबली या उच्च सदन से अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक होता है।

यदि सरकार संसद में वर्तमान में विचाराधीन छह अध्यादेशों में से किसी को भी पारित करने में विफल रहती है, तो गठबंधन को संकट का सामना करना पड़ सकता है।

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