विदेश की खबरें | विश्वास मत से पहले नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड ने अन्य दलों से वार्ता तेज की
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

काठमांडू, पांच जनवरी नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने अगले सप्ताह संसद में विश्वास मत से पहले आवश्यक बहुमत हासिल करने के लिए अन्य दलों के साथ बातचीत तेज कर दी है।

प्रचंड के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार को विश्वास मत जीतने के लिए 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में कम से कम 138 मतों की आवश्यकता है। प्रचंड का दावा है कि उन्हें 169 सांसदों का समर्थन हासिल है।

प्रचंड ने बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री और सीपीएन (यूनिफाइड सोशलिस्ट) के अध्यक्ष माधव कुमार नेपाल से समर्थन लेने के लिए मुलाकात की। माधव नेपाल के नेतृत्व वाली पार्टी के पास प्रतिनिधि सभा में 10 सीटें हैं।

‘माईरिपब्लिका’ अखबार ने बृहस्पतिवार को बताया कि सिंघ दरबार में माओवादी सेंटर के संसदीय दल कार्यालय में हुई बैठक के दौरान प्रचंड ने नई सरकार में मिलकर काम करने का प्रस्ताव रखा।

अखबार ने दहल के निजी सचिव रमेश मल्ला के हवाले से बताया कि प्रधानमंत्री ने विश्वास प्रस्ताव के दौरान सीपीएन (यूनिफाइड सोशलिस्ट) नेता से उनके पक्ष में वोट करने का अनुरोध किया।

माधव नेपाल ने हालांकि नई सरकार को अपनी पार्टी के समर्थन के बारे में प्रधानमंत्री को कोई भरोसा नहीं दिया।

सीपीएन (यूनिफाइड सोशलिस्ट) के नेता ने इससे पहले बुधवार को कहा था कि उनकी पार्टी को प्रचंड के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में शामिल होने की कोई जल्दी नहीं है।

यूएमएल, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी), राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी), जनता समाजवादी पार्टी (जेएसपी), जनमत पार्टी, नागरिक उन्मुक्ति पार्टी और तीन निर्दलीय सांसदों सहित 169 सांसदों के समर्थन से प्रचंड को नए प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था।

नई सरकार के गठन के 30 दिन के अंदर बहुमत साबित करना होता है।

बुधवार तक हालांकि यह निश्चित नहीं था कि 10 जनवरी को संसद में विश्वास मत के दौरान आरपीपी और जेएसपी दहल का समर्थन करेंगे या नहीं। जबकि जेएसपी ने कहा है कि वह सरकार में तभी शामिल होगी जब पार्टी को सरकार में एक सम्मानजनक स्थान दिया जाएगा, आरपीपी सरकार के न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) को देखकर ही दहल के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने का ऐलान भी किया है।

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