नेपाल नक्शा मामले पर भारत ने दी प्रतिक्रिया, कहा- यह ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं, इसे स्वीकार नहीं कर सकते

भारत ने शनिवार को नेपाल द्वारा नये मानचित्र में बदलाव करने और कुछ भारतीय क्षेत्र को शामिल करने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को संसद के निचले सदन द्वारा पारित किए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह कृत्रिम विस्तार साक्ष्य व ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं है और यह मान्य नहीं है. भारत इसे उत्तराखंड के पिथौरागढ़ का हिस्सा बताता है.

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पीएम मोदी (Photo Credits: Twitter)

नई दिल्ली, 14 जून: भारत ने शनिवार को नेपाल द्वारा नये मानचित्र में बदलाव करने और कुछ भारतीय क्षेत्र को शामिल करने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को संसद के निचले सदन द्वारा पारित किए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह कृत्रिम विस्तार साक्ष्य व ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं है और यह मान्य नहीं है. भारत ने कहा है कि यह लंबित सीमा मुद्दों का बातचीत के जरिये समाधान निकालने की हमारी वर्तमान समझ का भी उल्लंघन है. नेपाली संसद की प्रतिनिधि सभा (निचले सदन) में नए विवादित नक्शे को शामिल करते हुए राष्ट्रीय प्रतीक को अद्यतन करने के लिये संविधान की तीसरी अनुसूची को संशोधित करने संबंधी सरकारी विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया.

नेपाली संसद में इस प्रस्तावित कानून को मिले अभूतपूर्व समर्थन को भारत के लिये बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि भारत के साथ सीमा विवाद के मुद्दे पर नेपाल के सख्त रुख को लेकर राजनीतिक आम राय का संकेत देता है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने अपने बयान में कहा, "हमने नेपाल द्वारा नये मानचित्र में बदलाव करने और कुछ भारतीय क्षेत्र को शामिल करने के संविधान संशोधन विधेयक वहां के हाउस आफ रिप्रेजेंटेटिव में पारित होने को देखा है. हमने पहले ही इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है." उन्होंने कहा कि दावों के तहत कृत्रिम रूप से विस्तार साक्ष्य और ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं है और यह मान्य नहीं है.

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प्रवक्ता ने कहा, "यह लंबित सीमा मुद्दों का बातचीत के जरिये समाधान निकालने की हमारी वर्तमान समझ का भी उल्लंघन है." भारत के कड़े विरोध की अनदेखी करते हुए प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के नेतृत्व में नेपाली सरकार ने विधेयक पर सदन में मतदान कराया जबकि दोनों देशों में दशकों से बेहद मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं. अभूतपूर्व राष्ट्रीय एकता का प्रदर्शन करते हुए नेपाली कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता पार्टी-नेपाल और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी समेत प्रमुख विपक्षी दलों ने नए विवादित नक्शे को शामिल करते हुए राष्ट्रीय प्रतीक को अद्यतन करने के लिये संविधान की तीसरी अनुसूची को संशोधित करने संबंधी सरकारी विधेयक के पक्ष में मतदान किया.

संशोधिन नक्शे में भारत की सीमा से लगे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा इलाकों पर दावा किया गया है. ऐसा माना जाता है कि भारत ने नेपाली कांग्रेस समेत कुछ राजनीतिक दलों से संपर्क किया था लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला. भारत का आकलन है कि नेपाल ने प्रधानमंत्री ओली की प्रमुखता वाली नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी को चीन से मिले मजबूत समर्थन के बाद नए नक्शे की अपनी योजना को आगे बढ़ाया. विधेयक को अब नेपाल की नेशनल असेंबली में भेजा जाएगा, जहां से पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति विद्या भंडारी की मंजूरी हासिल करनी होगी जिसके बाद यह कानून बनेगा.

भारत और नेपाल के बीच रिश्तों में उस वक्त तनाव दिखा जब रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आठ मई को उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे को धारचुला से जोड़ने वाली रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 80 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन किया. नेपाल ने इस सड़क के उद्घाटन पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि यह सड़क नेपाली क्षेत्र से होकर गुजरती है. भारत ने नेपाल के दावों को खारिज करते हुए दोहराया कि यह सड़क पूरी तरह उसके भूभाग में स्थित है. नेपाल ने पिछले महीने देश का संशोधित राजनीतिक और प्रशासनिक नक्शा जारी कर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इन इलाकों पर अपना दावा बताया था.

भारत ने भी नवंबर 2019 में नया नक्शा प्रकाशित कर इन इलाकों को अपना क्षेत्र बताया था. काठमांडू द्वारा नया नक्शा जारी करने पर भारत ने नेपाल से कड़े शब्दों में कहा था कि वह क्षेत्रीय दावों को कृत्रिम रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का प्रयास न करे. वहीं, थलसेना अध्यक्ष जनरल एम एम नरवणे ने कहा था कि यह मानने के कारण हैं कि नेपाल ने किसी और के इशारे पर सड़क का विरोध किया है, उन्होंने इस विषय में चीन की भूमिका का संभवत: जिक्र करते हुए यह बात कही थी. इस पर नेपाल में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी.

लिपुलेख दर्रा कालापानी के निकट सबसे पश्चिमी बिंदु है जो भारत औरनेतापल के बीच एक विवादित इलाका है. भारत और नेपाल दोनों कालापानी को अपना अक्षुण इलाका बताते है. भारत इसे उत्तराखंड के पिथौरागढ़ का हिस्सा बताता है तो नेपाल इसे धारचुला जिले का हिस्सा बताता है.

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