देश की खबरें | नेहरू ने भारत को धार्मिक घृणा के व्यवस्थागत संघर्ष से रोका : विक्रम सेठ
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. प्रसिद्ध लेखक विक्रम सेठ ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू एक ‘‘उदार’’ व्यक्ति थे जिन्होंने तानाशाही पर लोकतंत्र को चुना था और भारतीयों को ‘‘एक-दूसरे से नफरत’’ करने से रोका था।
नयी दिल्ली, 20 मई प्रसिद्ध लेखक विक्रम सेठ ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू एक ‘‘उदार’’ व्यक्ति थे जिन्होंने तानाशाही पर लोकतंत्र को चुना था और भारतीयों को ‘‘एक-दूसरे से नफरत’’ करने से रोका था।
अपने मशहूर उपन्यास ‘ए सूटेबल ब्वॉय’ की 30वीं वर्षगांठ पर यहां ताजमहल होटल में सेठ ने शुक्रवार को देश के प्रथम प्रधानमंत्री की प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने भारत को खासतौर से 1947 में विभाजन के बाद ‘‘धार्मिक घृणा के व्यवस्थागत संघर्ष’’ से बचाया था।
लेखक ने कहा, ‘‘अपनी सभी खामियों के बावजूद नेहरू एक उदार व्यक्ति थे जो लोकतंत्र में यकीन रखते थे। वह बहुत लोकप्रिय थे। वह आसानी से तानाशाह बन सकते थे लेकिन नहीं बने। वह बहुत महत्वपूर्ण भी थे क्योंकि उन्होंने हमें एक-दूसरे से नफरत करने से बचाया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भारत जैसे देश में जो कि एक समृद्ध सभ्यता है, विभाजन के बाद भी नेहरू ने हमें धार्मिक घृणा के व्यवस्थागत संघर्ष से रोक दिया था।’’
सेठ (70) ने 1962 में भारत-चीन युद्ध या कश्मीर से निपटने में नेहरू की भूमिका के संदर्भ में कहा कि नेहरू और उनके बाद प्रधानमंत्री बने लाल बहादुर शास्त्री तथा इंदिरा गांधी ने भी भारतीयों को इस आधार पर एक-दूसरे से नफरत करने से रोके रखा कि वे किससे प्यार करते हैं, वे क्या खाते हैं और वे किसकी पूजा करते हैं।
उन्होंने इन आधार पर एक-दूसरे से नफरत करने वाले भारतीयों को ‘‘देशद्रोही’’ तथा ‘‘गैर-हिंदू’’ भी बताया और कहा कि इससे देश की ताकत ही बंटेगी।
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