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विकास की अपनी अवधारणा पर पुनर्विचार की जरूरत : उपराष्ट्रपति

नायडू ने मंगलवार को 50वें विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर अपने संदेश में कहा, ‘‘हमें प्रकृति के संरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए, अपनी उपभोक्तावादी जीवन शैली में परिवर्तन करना चाहिए तथा विकास की अपनी अवधारणा पर पुनर्विचार करना चाहिये।’’

विकास की अपनी अवधारणा पर पुनर्विचार की जरूरत : उपराष्ट्रपति
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नयी दिल्ली, 21 अप्रैल उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर देशवासियों से पृथ्वी के पर्यावरण को हरा-भरा और स्वच्छ बनाने का आह्वान करते हुये कहा कि पर्यावरण अनुकूल नीतियां अपना कर ही प्रकृति सम्मत विकास संभव है और इसी पर सभी का भविष्य निर्भर करेगा।

नायडू ने मंगलवार को 50वें विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर अपने संदेश में कहा, ‘‘हमें प्रकृति के संरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए, अपनी उपभोक्तावादी जीवन शैली में परिवर्तन करना चाहिए तथा विकास की अपनी अवधारणा पर पुनर्विचार करना चाहिये।’’

उपराष्ट्रपति ने कहा कि कोरोना महामारी के अनुभव ने हमें अपनी विकास और आर्थिक नीतियों की नए सिरे से पुनः समीक्षा करने का सबक दिया है। उन्होंने कोरोना संकट का हवाला देते हुये विकास की नई अवधारणा को विकसित करने की जरूरत पर बल दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘ लॉकडाउन के कारण समूची दुनिया थम सी गयी है, जिससे तमाम तरह के प्रदूषण में गिरावट देखी जा रही है, वायु अधिक स्वच्छ हो गई है, हमें समझना चाहिए कि मानव ने किस हद तक प्राकृतिक संतुलन को हानि पहुंचाई है।’’

उल्लेखनीय है कि 50वें विश्व पृथ्वी दिवस का विषय जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में ‘क्लाइमेट एक्शन’ है।

उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हमें अपनी पिछली गलतियों से सीखना चाहिए और अपने अस्तित्व मात्र के लिए प्रकृति तथा मानव के बीच परस्पर निर्भरता को समझना चाहिए। आज हम एक दूसरे पर निर्भरता वाले विश्व में रह रहे हैं। ऐसे में हम विकास तथा आधुनिकीकरण के लिए पुराना ढर्रा अपना कर नहीं रह सकते हैं, क्योंकि हमारा हर कदम पर्यावरण पर प्रभाव डालता है।’’

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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 21, 2020 09:47 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).