देश की खबरें | सहकारी क्षेत्र को और अधिक पारदर्शी, भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की आवश्यकता: शाह

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश में सहकारिता आंदोलन को सफल बनाने के लिए अधिक पारदर्शिता, भ्रष्टाचार को पूरी तरह दूर रखने और साख बढ़ाने पर शुक्रवार को जोर दिया।

बेंगलुरु, एक अप्रैल केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश में सहकारिता आंदोलन को सफल बनाने के लिए अधिक पारदर्शिता, भ्रष्टाचार को पूरी तरह दूर रखने और साख बढ़ाने पर शुक्रवार को जोर दिया।

उन्होंने कहा कि सहकारी क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उत्थान की क्षमता है और यह राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर योगदान देता है। उन्होंने कहा कि सहकारिता आंदोलन ने गरीब लोगों को अपनी आय बढ़ाने में मदद की है।

शाह ने सहकारिता पर एक सम्मेलन के दौरान कहा, ‘‘मुझे सहकारी क्षेत्र में अपार संभावनाएं नजर आती हैं लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं। अगर हम इनका समाधान नहीं करते हैं, तो आने वाले दिनों में अगली पीढ़ी को यह पता नहीं चलेगा कि यह आंदोलन क्या है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं चाहता हूं कि सहकारी क्षेत्र अधिक पारदर्शी हो और इसकी विश्वसनीयता बढ़े। इस क्षेत्र में भ्रष्टाचार को रोकना होगा। हमें चुनाव को पारदर्शी बनाना है। भर्तियों और पदोन्नति को पारदर्शी होना चाहिए।’’

शाह ने कहा कि केंद्र सरकार सहकारी क्षेत्र में खरीदारी को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए राष्ट्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल ‘गवर्नमेंट मार्केटप्लेस’ (जीईएम) के उपयोग को मंजूरी देने जा रही है।

उन्होंने कहा कि जब जीईएम के माध्यम से खरीद की जाएगी तो भ्रष्टाचार समाप्त हो जाएगा।

शाह ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत के शताब्दी वर्ष में प्रवेश करने पर सहकारिता आंदोलन हर गांव तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हम इसे पारदर्शी और भरोसेमंद बनाएंगे। हम सहकारिता का उपयोग गरीबी उन्मूलन और कृषि विकास के लिए एक उपकरण के रूप में करेंगे।’’

उन्होंने कहा कि ‘लिज्जत पापड़’ नाम से महिलाओं का एक छोटा उद्यम 33 देशों को अपने उत्पादों का निर्यात करता है। उन्होंने बताया कि

कर्नाटक का नंदिनी दूध 17,000 करोड़ रुपये के कारोबार के साथ कर्नाटक का एक प्रमुख सहकारी ब्रांड बन गया है।

कृषि आय को दोगुना करने में सहकारिता की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) के गठन को मजबूत करना, सहकारिता मंत्रालय, मत्स्य और दूध उत्पादन इस दिशा में किए गए उपायों में से हैं।

केंद्रीय मंत्री ने अलग सहकारिता मंत्रालय बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहना की। उन्होंने कहा कि दशकों पुरानी मांग का जवाब देकर प्रधानमंत्री ने सहकारिता आंदोलन को बड़ा समर्थन दिया है।

शाह ने कहा, ‘‘विभिन्न समितियों की सिफारिशें, जो धूल फांक रही थीं, अब उन पर गौर किया जाएगा। हम सहकारी क्षेत्र में बड़े बदलाव की योजना बना रहे हैं। केंद्र सरकार विभिन्न सहकारिता मंत्रियों की बैठक बुलाने जा रही है।’’

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