जरुरी जानकारी | दवा उद्योग के कच्चे माल के स्रोत को विविध बनाने, अनुसंधान पर खर्च बढ़ाने की जरूरत: आरबीआई लेख
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. कोविड -19 महामारी भारतीय दवा उद्योग के लिए एक बड़े दबाव परीक्षण के रूप में रही है। इससे आयातित कच्चे माल पर इसकी अधिक निर्भरता और ‘आश्चर्यजनक रूप से कम’ अनुसंधान और विकास प्रयासों की बात सामने आयी। यह बात आरबीआई की जुलाई माह की पत्रिका के एक लेख में कही गयी है।
मुंबई, 15 जुलाई कोविड -19 महामारी भारतीय दवा उद्योग के लिए एक बड़े दबाव परीक्षण के रूप में रही है। इससे आयातित कच्चे माल पर इसकी अधिक निर्भरता और ‘आश्चर्यजनक रूप से कम’ अनुसंधान और विकास प्रयासों की बात सामने आयी। यह बात आरबीआई की जुलाई माह की पत्रिका के एक लेख में कही गयी है।
शिबंजन दत्ता और धीरेंद्र गजभिये के इस लेख में कहा गया है, ‘‘भारतीय औषधि क्षेत्र में एक तरफ कच्चे माल के लिये आयात पर निर्भरता काफी ज्यादा है। दूसरी तरफ निर्यात को लेकर आश्चर्यजनक रूप से अनुसंधान एवं विकास काफी कम है। ऐसे में कच्चे माल के आयात के लिए स्रोत को विविध रूप देने की जरूरत है ताकि संभावित आपूर्ति-पक्ष बाधाओं को कम किया जा सके।’’
इसमें कहा गया है कि देश मात्रा के हिसाब से दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा और मूल्य के हिसाब से चौदहवां औषधि निर्माता है। यह क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद में 2 प्रतिशत और कुल वस्तु निर्यात में 8 प्रतिशत का योगदान देता है।
महामारी संभवत: वर्तमान सदी में दवा उद्योग के लिए एक बड़े दबाव परीक्षण के रूप में रही है। लेकिन इस दौरान देश का निर्यात 21 प्रतिशत बढ़ा।
लेख में कहा गया है कि अपनी आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के अलावा, देश औषधि के एक विश्वसनीय निर्यातक के रूप में खड़े होकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में क्षेत्र में स्थिति मजबूत करने के लिए महामारी का उपयोग कर सकता है।
इसमें देश की निर्यात प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने के लिये अनुसंधान एवं विकास पर खर्च बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
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