अमरोहा (उप्र), 13 सितंबर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने जिला मजिस्ट्रेट राजेश कुमार त्यागी को अमरोहा के हिल्टन कॉन्वेंट स्कूल में एक छात्र को निलंबित किए जाने संबंधी मामले की जांच करने और 10 दिन में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
वहीं, जिला बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने स्कूल के प्राचार्य को आयोग के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है, जबकि छात्र की मां ने दावा किया है कि उसके तीन बच्चों ने डर के कारण स्कूल जाना बंद कर दिया है।
यह कदम अल्पसंख्यक समुदाय के एक छात्र को टिफिन में मांसाहारी भोजन लाने के कारण स्कूल से निलंबित किए जाने की खबरों के बीच उठाया गया है, हालांकि इस आरोप को बाद में जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) वीपी सिंह की अध्यक्षता वाली टीम द्वारा की गई जांच में खारिज कर दिया गया था।
जांच समिति की रिपोर्ट के बावजूद अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र के साथ भेदभाव किए जाने का मुद्दा शांत नहीं हुआ है। इसके चलते अब एनसीपीसीआर ने बृहस्पतिवार को जिला मजिस्ट्रेट को इस मुद्दे पर नए सिरे से जांच करने और 10 दिन में रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
इस बीच, सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष अतुलेश कुमार भारद्वाज ने पत्रकारों को बताया कि समिति ने किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत घटना का स्वत: संज्ञान लिया है।
उन्होंने नाबालिग बच्चों से जुड़े उत्पीड़न के मामलों की जांच करने और उचित कार्रवाई करने के लिए समिति के अधिकार पर जोर दिया।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि पीड़ित छात्र की मां के तीन बच्चे उसी स्कूल में पढ़ते हैं।
छात्र की मां ने ‘पीटीआई-’ को बताया, "उस दिन स्कूल में जो कुछ हुआ, उसने मेरे सभी बच्चों को इतना झकझोर दिया है कि अब वे स्कूल जाने से भी डरते हैं।" पांच सितंबर के विवाद के बाद महिला ने आरोप लगाया था कि उसके एक बच्चे को स्कूल के टिफिन में मांसाहारी भोजन लाने के कारण निलंबित कर दिया गया।
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