देश की खबरें | एनसीपीसीआर ने एनसीईआरटी को लिंग-तटस्थ शिक्षक प्रशिक्षण नियमावली में ‘विसंगतियां’ सुधारने को कहा
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नयी दिल्ली, चार नवंबर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने कहा है कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की लिंग-तटस्थ शिक्षक प्रशिक्षण नियमावली विविध जीववैज्ञानिक आवश्यकताओं वाले बच्चों को समान अधिकारों से वंचित करेगी। आयोग ने एनसीईआरटी को इसमें ‘‘विसंगतियों’’ को सुधारने के लिए कहा है।
एनसीपीसीआर ने यह भी दावा किया कि नियमावली बच्चों के लिए लिंग-तटस्थ बुनियादी ढांचे का सुझाव देती है जो उनकी लैंगिक वास्तविकताओं और बुनियादी जरूरतों के अनुरूप नहीं है।
शिक्षकों के लिए नयी नियमावली का उद्देश्य उन्हें एलजीबीटीक्यू समुदायों के प्रति शिक्षित करने और संवेदनशील बनाना है। यह स्कूलों को ट्रांसजेंडर बच्चों के लिए संवेदनशील और समावेशी बनाने के लिए प्रथाओं और रणनीतियों पर प्रकाश डालता है।
इन रणनीतियों में लिंग-तटस्थ शौचालय और वर्दी का प्रावधान, गैर-शिक्षण कर्मचारियों को संवेदनशील बनाना, ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों को परिसर में बोलने के लिए आमंत्रित करना, आदि शामिल है।
एनसीईआरटी के निदेशक को लिखे पत्र में आयोग ने कहा है कि उसे एनसीईआरटी में ‘जेंडर स्टडीज’ विभाग द्वारा प्रकाशित ‘इंक्लूजन आफ ट्रांसजेंडर चिल्ड्रेन इन स्कूल एजुकेशन: कन्सर्न्स एंड रोड मैप’ शीर्षक वाली नियमावली की सामग्री के बारे में एक शिकायत मिली है।
शिकायतकर्ता ने कहा कि नियमावली का पाठ बच्चों के लिए लिंग-तटस्थ बुनियादी ढांचे का सुझाव देता है जो उनकी लिंग वास्तविकताओं और बुनियादी जरूरतों के अनुरूप नहीं है।
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