देश की खबरें | एनसीईएल को 14.92 लाख टन गैर-बासमती चावल, 50 हजार टन चीनी निर्यात की अनुमति मिली: शाह
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. नवगठित सहकारी निर्यात निकाय एनसीईएल को 16 देशों को 14,92,800 टन गैर-बासमती चावल और दो देशों को 50,000 टन चीनी निर्यात करने की अनुमति मिल गई है। सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा को यह जानकारी दी।
नयी दिल्ली, छह दिसंबर नवगठित सहकारी निर्यात निकाय एनसीईएल को 16 देशों को 14,92,800 टन गैर-बासमती चावल और दो देशों को 50,000 टन चीनी निर्यात करने की अनुमति मिल गई है। सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा को यह जानकारी दी।
नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (एनसीईएल) को इस साल जनवरी में बहु-राज्य सहकारी सोसायटी अधिनियम, 2002 के तहत पंजीकृत किया गया था।
इसमें बड़ी संख्या में सहकारी समितियों को शामिल करके कृषि और संबद्ध गतिविधियों के साथ-साथ हथकरघा और हस्तशिल्प वस्तुओं को भी शामिल किया गया है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2025 तक अपने राजस्व को लगभग 2,160 करोड़ रुपये के मौजूदा स्तर से दोगुना करना है।
शाह ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में कहा कि एनसीईएल को अब तक 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से विभिन्न वर्गों के तहत सदस्यता के लिए 2,581 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
शाह ने कहा, ‘‘एनसीईएल को अब तक 16 देशों को 14,92,800 टन गैर-बासमती सफेद चावल और दो देशों को 50,000 टन चीनी के निर्यात की अनुमति मिल चुकी है।’’
उन्होंने कहा, एनसीईएल हमारे किसानों के लाभ के लिए मुख्य रूप से कृषि वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करेगा, जिसमें भारत को तुलनात्मक लाभ है।
उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्तर से लेकर शीर्ष स्तर तक की सभी सहकारी समितियां, जो निर्यात में रुचि रखती हैं, इसके सदस्य बनने के लिए पात्र हैं।
मंत्री ने आगे कहा कि एनसीईएल देश की भौगोलिक सीमा से परे व्यापक बाजारों तक पहुंच बनाकर भारतीय सहकारी क्षेत्र में उपलब्ध अधिशेष जिसों के निर्यात पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिससे दुनिया भर में भारतीय सहकारी उत्पादों/सेवाओं की मांग बढ़ेगी और इस उत्पाद और सेवाओं के लिए सर्वोत्तम संभव कीमतें प्राप्त होंगी।
उन्होंने कहा कि यह सहकारी समितियों द्वारा उत्पादित सभी प्रकार की वस्तुओं और सेवाओं की खरीद, भंडारण, प्रसंस्करण, विपणन, ब्रांडिंग, लेबलिंग, पैकेजिंग, प्रमाणन, अनुसंधान और विकास आदि और व्यापार सहित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से निर्यात को बढ़ावा देगा।
उन्होंने कहा कि यह सोसायटी सहकारी समितियों को विभिन्न मंत्रालयों की विभिन्न निर्यात संबंधी योजनाओं और नीतियों का लाभ केंद्रित तरीके से दिलाने में भी मदद करेगी।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)