जरुरी जानकारी | नैवेली संयंत्र विस्फोट : एनजीटी का केंद्र को तापीय बिजलीघरों का सुरक्षा ऑडिट कराने का निर्देश
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नयी दिल्ली, 24 दिसंबर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने तमिलनाडु में नैवेली लिग्नाइट पावर प्लांट में विस्फोट मामले को संज्ञान में लेते हुए केंद्र को छह महीने के भीतर देश भर में तापीय बिजलीघरों का सुरक्षा ऑडिट कराने का निर्देश दिया है। इस पहल का मकसद खतरनाक गैसों के रिसाव से उत्पन्न होने वाली घटनाओं से बचना है।
एनजीटी चेयरपर्सन न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल ने अधिकरण द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट को देखने के बाद यह आदेश दिया।
रिपोर्ट के अनुसार घटना का कारण रखरखाव की स्थिति का विफल होना था। जिन कर्मचारियों के पास यह जिम्मेदारी थी, उनके पास मानक परिचालन प्रक्रिया और व्यवस्था की जानकारी नहीं थी।
पीठ ने कहा, ‘‘कर्मचारियों को न तो उचित प्रशिक्षण दिया गया था और न ही उनके पास जरूरी कार्य परमिट था। इस प्रकार, घटना के लिये परिचालन और रखरखाव प्रमुख मुख्य रूप से जवाबदेह हैं।’’
पीठ ने कहा, ‘‘कारखाना कानून, 1948 की धारा 38 के तहत सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ है। विनिर्माण, भंडारण, खतरनाक रसायन नियमावली, 1989 का भी उल्लंघन हुआ है....।’’
समिति ने एनजीटी से यह भी कहा कि परियोजना स्थल और उसके आसपास आपात योजना तैयार करना अनिवार्य है। साथ ही छह महीने में इस प्रकार की स्थिति से निपटने के लिये अभ्यास (मॉक ड्रिल) करते रहना चाहिए।
पीठ ने कहा, ‘‘हम भारत सरकार के बिजली और कोयला मंत्रालयों के सचिवों को जरूरत के अनुसार इस प्रकार के अन्य विभागों/संस्थानों के साथ मिलकर देश भर में एक जैसे तापीय बिजलीघरों के सुरक्षा ऑडिट कराने का निर्देश देते हैं। यह सुरक्षा ऑडिट छह महीने के भीतर हो ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।’’
अधिकरण ने बिजली संयंत्रों को सभी सुरक्षा उपाय अपनाने का भी निर्देश दिया। उसने कहा कि इस विषय पर विशेषज्ञों की टीम के साथ-साथ नियामक इस पर लगातार नजर रखे और ऑडिट करे।
इससे पहले,न्यायाधिकरण ने तमिलनाडु में नैवेली लिग्नाइट पावर प्लांट में एक जुलाई को बॉयलर विस्फोट मामले में एनएलसी इंडिया लि. पर अंतरिम तौर पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। इस हादसे में 13 कर्मचारियों की मौत हो गयी थी जबकि 10 घायल हो गये थे।
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