विदेश की खबरें | युद्ध के खतरों के बीच नाटो की परमाणु वार्ता, पुतिन ने दी धमकी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. नाटो के सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों की यह बैठक संगठन के ब्रसेल्स स्थित मुख्यालय में हुई। यह बैठक आमतौर पर वर्ष में एक बार या दो बार आयोजित होती है।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

नाटो के सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों की यह बैठक संगठन के ब्रसेल्स स्थित मुख्यालय में हुई। यह बैठक आमतौर पर वर्ष में एक बार या दो बार आयोजित होती है।

यह बैठक बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि के बीच आयोजित की गयी है, क्योंकि नाटो के कुछ सहयोगी देश रूसी हवाई हमलों के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व में यूक्रेन को उन्नत हथियारों और हथियारों की आपूर्ति करते हैं।

नाटो रूस की गतिविधियों पर सतर्क नजर रख रहा है, लेकिन परमाणु हमलों को लेकर अभी तक उसके (रूस के) रुख में कोई अंतर नहीं आया है।

लेकिन फिलहाल अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं क्योंकि अतिरिक्त अनिश्चितता नाटो राजनयिकों के अनुसार, रूस भी नाटो के सदस्य देशों के परमाणु अभ्यास के समय या उसके ठीक बाद अपना परमाणु अभ्यास करने वाला है।

इससे युद्ध के संदर्भ में 30 देशों के इस सैन्य संगठन का अनुमान और रूस के इरादों को भांप पाना मुश्किल हो रहा है।

ब्रिटेन के रक्षा मंत्री बेन वालेस ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘रूस भी वार्षिक परमाणु युद्धाभ्यास करेगा और मुझे लगता है कि शायद यह वार्षिक अभ्यास के एक सप्ताह बाद या उसके ठीक बाद होगा, लेकिन हम नियमित अभ्यास से अलग कुछ नहीं चाहते हैं।’’

वालेस ने कहा, ‘‘यह एक नियमित अभ्यास है और यह सब तैयारी के बारे में है, ठीक वैसे ही जैसे ‘नाटो की बैठक यह सुनिश्चित करने के बारे में है कि हम किसी भी चीज़ के लिए तैयार हैं। मेरा मतलब है, यह सुनिश्चित करना कि 30 साझेदार एक साथ जवाब देने को तैयार हैं, गठबंधन का दायित्व है और हमें उस पर काम करना जारी रखना होगा।’’

नाटो का अभ्यास, जिसे ‘स्टीडफास्ट नून’ कहा जाता है, जो हर साल लगभग एक ही समय पर आयोजित किया जाता है तथा यह लगभग एक सप्ताह तक चलता है।

इसमें परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम लड़ाकू जेट शामिल हैं, लेकिन इसमें कोई जीवित बम शामिल नहीं होता है। पारंपरिक जेट, और निगरानी तथा ईंधन भरने वाले विमान भी इसमें नियमित रूप से भाग लेते हैं।

चौदह नाटो सदस्य देश उस अभ्यास में शामिल होंगे, जिसकी योजना 24 फरवरी को रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण करने से पहले बनाई जा चुकी थी।

गौरतलब है कि यूक्रेन युद्ध में रूस की योजनाएं गड़बड़ा गई हैं, इसलिए पुतिन ने बार-बार संकेत दिया है कि वह रूसी हितों की रक्षा के लिए परमाणु हथियारों का सहारा ले सकते हैं।

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