विदेश की खबरें | नाटो को दक्षिणपूर्व एशिया में संभल कर कदम रखने चाहिए, जहां उपनिवेशवाद के जख्म अब भी ताजा हैं
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. न्यू बर्न्सविक, 30 मई (द कन्वरसेशन) उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मौजूदगी ऐसा कदम है जो क्षेत्रीय संघर्ष तथा तनाव को बढ़ाएगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि नाटो को यूरोपीय उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद के उसके इतिहास से अलग नहीं किया जा सकता, जिसने आधुनिक एशिया को आकार दिया- तथा आज जो चीनी राष्ट्रवाद में अहम भूमिका निभाता है।
न्यू बर्न्सविक, 30 मई (द कन्वरसेशन) उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मौजूदगी ऐसा कदम है जो क्षेत्रीय संघर्ष तथा तनाव को बढ़ाएगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि नाटो को यूरोपीय उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद के उसके इतिहास से अलग नहीं किया जा सकता, जिसने आधुनिक एशिया को आकार दिया- तथा आज जो चीनी राष्ट्रवाद में अहम भूमिका निभाता है।
नाटो ने 2022 में घोषणा की थी कि चीन सहयोगियों के ‘‘हितों, सुरक्षा तथा मूल्यों’’ के लिए ‘‘चुनौती’’ है। हाल में नाटो ने तर्क दिया कि यू्क्रेन के खिलाफ युद्ध में चीन का रूस को संभावित सहयोग,चीन को यूरोप के लिए सैन्य खतरा बनाता है।
नाटो जापान में एक संपर्क कर्यालय खोल रहा है और यह जापान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड तथा दक्षिण कोरिया के साथ साझेदार है। यह एशिया के सुरक्षा तंत्र में यूरोपीय दखल को गहरा करने का पहला कदम हो सकता है।
जापान का तर्क है कि यूक्रेन युद्ध ने दुनिया को अस्थिर कर दिया है और उसने चीन को रोकने के लिए नाटो को हिंद प्रशांत में आमंत्रित किया है। हालांकि नाटो पर गैर पश्चिमी देशों में ज्यादा भरोसा नहीं किया जाता।
नाटो: एक अमेरिकी कठपुतली?
शीत युद्ध की समाप्ति के बाद से नाटो ने अमेरिकी शक्ति के विस्तार की तरह काम किया है। कोसोवो और सर्बिया पर 1999 में नाटो की बमबारी ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन किया। अफगानिस्तान में नाटो के हस्तक्षेप को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अधिकृत किया गया था, लेकिन इसने इराक पर अवैध और विनाशकारी आक्रमण में अमेरिका की सहायता की।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी लीबिया में नाटो के हस्तक्षेप को हरी झंडी दे दी लेकिन नाटो के सदस्य देशों ने उत्तरी अफ्रीकी देश में अपने राजनीतिक और आर्थिक उद्देश्यों को बढ़ाने के लिए उस प्रस्ताव की शर्तों का उल्लंघन किया।
बहुत कम देश यूक्रेन पर रूस के आक्रमण का समर्थन करते हैं।
चीन क्षेत्रीय समृद्धि को आगे बढ़ाता है।
अधिकतर दक्षिण पूर्व एशियाई देशों ने पश्चिम के साथ अपनी पुरानी समस्याओं को हल कर लिया है। वे एक अंतरराष्ट्रीय प्रणाली के लिए प्रतिबद्ध हैं।
क्षेत्रीय देश चीन के बढ़ते कदमों और डराने-धमकाने वाली उसकी गतिविधियों से चिंतित हैं। इसके बावजूद चीन अधिकतर एशियाई देशों का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। क्षेत्रीय समृद्धि चीन की सफलता पर निर्भर है।
एशियाई ताइवान जैसे मुद्दों पर पश्चिमी उकसावे से सावधान है। एशियाई चीन की ताकत को संतुलित रखने के लिए अमेरिका की मौजूदगी चाहते हैं,लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे यूरोपीय सैन्य गठबंधन की क्षेत्र में गतिविधियों पर हामी भरते हैं ।
पिछली कई सदियों में वैश्विक राजनीति पश्चिमी उपनिवेशवाद और हिंसा से परिभाषित हुई है। वह युग वास्तव में कभी समाप्त नहीं हुआ।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)