देश की खबरें | हरियाणा के मूल निवासियों को राज्य में नौकरियों पर पहला अधिकार होना चाहिए: भूपेंद्र हुड्डा

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चंडीगढ़, 29 अप्रैल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मंगलवार को कहा कि राज्य में नौकरियों पर पहला अधिकार हरियाणा के मूल निवासियों का होना चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने पूछा, ‘‘अगर सभी अन्य राज्य अपनी नौकरियों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देते हैं, तो हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ऐसा क्यों नहीं करती है।’’

हुड्डा ने यहां जारी एक बयान में दावा किया कि राज्य के युवाओं को नौकरियों की सबसे ज्यादा जरूरत है, क्योंकि "बेरोजगारी के मामले में हरियाणा देश में नंबर एक’’ राज्य है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘सत्तारूढ़ भाजपा हरियाणा के युवाओं को नौकरियों से पूरी तरह वंचित करने की नीति पर चल रही है, यही वजह है कि अन्य राज्यों के युवाओं को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी भर्तियों के वास्ते जानबूझकर नियम बनाए जा रहे हैं।"

उन्होंने दावा किया, ‘‘सिंचाई विभाग में सहायक अभियंताओं की हाल ही में हुई भर्ती इसका स्पष्ट उदाहरण है। हैरानी की बात यह है कि सामान्य श्रेणी के 42 पदों पर दूसरे राज्यों के 28 लोगों को नौकरी दी गई। यह बेहद निंदनीय है, क्योंकि हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) की 70 प्रतिशत नौकरियां हरियाणा के बाहर के निवासियों को दी जाती हैं।’’

हुड्डा ने यह भी कहा कि उपमंडल अधिकारियों, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों से लेकर व्याख्याताओं तक की कई भर्ती प्रक्रियाओं में स्थानीय युवाओं के साथ यह ‘‘अन्याय’’ पहले भी किया जा चुका है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, ‘‘एचपीएससी द्वारा सहायक पर्यावरण अभियंता भर्ती के पाठ्यक्रम से हरियाणा के जीके (सामान्य ज्ञान) को हटा दिया गया है। इतना ही नहीं, एचपीएससी ने उन उम्मीदवारों को भी हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) परीक्षा के लिए आवेदन करने की अनुमति दे दी है, जिनके पास हरियाणा का मूल निवासी प्रमाण-पत्र नहीं है।"

हुड्डा ने बयान में दावा किया कि तकनीकी शिक्षा विभाग में सामान्य श्रेणी में प्रोफेसरों के 153 पदों में से 106 पर राज्य के बाहर के उम्मीदवारों का चयन किया गया।

उन्होंने कहा, ‘‘आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी भर्ती के लिए सामान्य श्रेणी में 427 पदों में से 394 की सूची जारी की गई थी। लेकिन चयनित उम्मीदवारों में से 75 प्रतिशत बाहरी थे... इससे पहले एचसीएस भर्ती में 35 से 40 प्रतिशत बाहरी उम्मीदवार चुने जाते थे।’’

हुड्डा ने यह भी दावा किया कि सभी राज्य, खासकर भाजपा शासित राज्य, नौकरियों में स्थानीय लोगों को वरीयता देने के लिए सख्त नियम बना रहे हैं, राज्य से संबंधित सामान्य ज्ञान के प्रश्न बढ़ा रहे हैं और भर्ती पत्रों में स्थानीय जानना अनिवार्य कर रहे हैं।

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