विदेश की खबरें | लामा से प्राप्त नैनोबॉडी कोविड-19 के उपचार में मददगार: अध्ययन

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. लामा पशु द्वारा निर्मित छोटे-छोटे एंटीबॉडी को कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति में नाक के जरिए डालने से संक्रमण का संभवत: उपचार हो सकता है। एक अध्ययन में यह दावा किया गया।

लंदन, 22 सितंबर लामा पशु द्वारा निर्मित छोटे-छोटे एंटीबॉडी को कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति में नाक के जरिए डालने से संक्रमण का संभवत: उपचार हो सकता है। एक अध्ययन में यह दावा किया गया।

ब्रिटेन में रोसलिंड फ्रैंकलिन इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने पाया कि नैनोबॉडी (एंटीबॉडी का एक छोटा एवं सरल रूप) सार्स-सीओवी-2 वायरस को प्रभावी ढंग से लक्ष्य बना सकते हैं।

नेचर कम्युनिकेशंस पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में दर्शाया गया है कि प्रयोगशाला में बड़ी मात्रा में पैदा किए जा सकने वाले अणुओं की छोटी श्रृंखला को जब परीक्षण के लिए इस्तेमाल किए संक्रमित पशुओं के शरीर में पहुंचाया गया तो इसने कोविड-19 बीमारी के लक्षणों को कम किया।

अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि सार्स-सीओवी-2 वायरस से कसकर बंधने में सक्षम नैनोबॉडी, इसे कोशिका संवर्धन में बेअसर कर देते हैं और ये कोविड-19 से उबर चुके मरीजों से लिए गए मानव एंटीबॉडी की तुलना में एक सस्ता और आसान विकल्प प्रदान कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान संक्रमण के गंभीर मामलों के उपचार के दौरान मानव एंटीबॉडी का इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण तरीका रहा है, लेकिन इन्हें संक्रमित व्यक्ति को आमतौर पर अस्पताल में सुई के माध्यम से ही दिया जा सकता है।

रोसलिंड फ्रैंकलिन इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर रे ओवेन्स और अनुसंधान के प्रमुख लेखक ने कहा, ‘‘मानव एंटीबॉडी की तुलना में नैनोबॉडी के कई फायदे हैं।’’

ओवेन्स ने कहा, ‘‘इन्हें निर्मित करना अपेक्षाकृत सस्ता है और ये नेबुलाइजर या नाक में स्प्रे के माध्यम से सीधे श्वसन मार्ग में पहुंचाए जा सकते हैं, इसलिए इंजेक्शन की आवश्यकता नहीं पड़ती और इन्हें घर पर स्वयं लिया जा सकता है।’’

इस अनुसंधान के लिए लामा का एक छोटा रक्त नमूना लिया गया और अनुसंधानकर्ता शोधन प्रक्रिया के बाद सार्स-सीओवी-2 वायरस से बंधने में सक्षम चार नैनोबॉडी हासिल करने में सफल रहे। फिर नैनोबॉडी की वायरस से बंधने की क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें तीन की श्रृंखला में एक साथ जोड़ा गया। इसके बाद उन्हें प्रयोगशाला में कोशिकाओं में बनाया गया।

अनुसंधानकर्ताओं के इस दल में लिवरपूल विश्वविद्यालय, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और इंग्लैंड जन स्वास्थ्य के वैज्ञानिक शामिल थे। इस दल ने पाया कि तीन नैनोबॉडी श्रृंखलाएं सार्स-सीओवी-2 वायरस के मूल स्वरूप और ब्रिटेन के केंट में सबसे पहले पाए गए अल्फा स्वरूप दोनों को बेअसर करने में सक्षम हैं। चौथी नैनोबॉडी श्रृंखला दक्षिण अफ्रीका में सबसे पहले पाए गए बीटा स्वरूप को बेअसर करने में सक्षम पाई गई।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\