देश की खबरें | नायडू ने बुजुर्गों की समस्याओं के समाधान के लिए बेहतर शिकायत निपटारा तंत्र की हिमायत की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने बुजुर्गों के मुद्दों के निपटारा के लिए बेहतर शिकायत निपटारा तंत्र की जरूरत को रेखांकित किया और कहा कि उनकी जरूरतों के समाधान के लिए स्वास्थ्य सुविधा तंत्र को भी दुरूस्त करने की आवश्यकता है ।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 30 अगस्त उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने बुजुर्गों के मुद्दों के निपटारा के लिए बेहतर शिकायत निपटारा तंत्र की जरूरत को रेखांकित किया और कहा कि उनकी जरूरतों के समाधान के लिए स्वास्थ्य सुविधा तंत्र को भी दुरूस्त करने की आवश्यकता है ।

फेसबुक पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के पास ज्ञान और समझ का भंडार होता है और जीवन की संध्या बेला में उनके साथ सम्मान, लगाव, स्नेह से पेश आना चाहिए ।

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उन्होंने लिखा, ‘‘युवाओं समेत यह हर किसी का कर्तव्य है कि वो बुजुर्गों की देखभाल करें । वरिष्ठ नागरिकों के लिए वृद्धाश्रम का चलन ना केवल समाज में आए बदलाव को दिखाता है बल्कि पारिवारिक मूल्यों में गिरावट को भी यह दर्शाता है।’’

नायडू ने कहा कि आज की जीवनशैली पीढियों से मिले सांस्कृतिक मूल्यों, परंपरा को बनाए रखने में संयुक्त परिवार व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका को नुकसान पहुंचा रही है।

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उन्होंने कहा, ‘‘हमें संयुक्त परिवार की व्यवस्था के पुराने चलन में फिर से भरोसा कायम करने की जरूरत है। संयुक्त परिवार के भीतर सामाजिक सुरक्षा की भावना होती है।’’

नायडू ने कहा कि बच्चों का उनके दादा-दादी, नाना-नानी के साथ मजबूत भावनात्मक रिश्ता कायम होता है और मुश्किल वक्त में उन्हें कठिनाइयों से उबरने में मार्गदर्शन मिलता है । बदले में बुजुर्गों को परिवार के युवाओं से प्यार, स्नेह मिलता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है और 2050 तक भारत की आबादी में बुजुर्गों का हिस्सा 20 प्रतिशत होगा।

उन्होंने कहा कि देश में काफी सारे बुजुर्ग अकेले रहते हैं या वे अपने बच्चों पर निर्भर रहते हैं।

नायडू ने कहा शहरों में आवास की दिक्कत और घर का आकार छोटा होने समेत कुछ अन्य कारणों से बच्चे अपने अभिभावकों को उनके पैतृक स्थल पर छोड़ देते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘बुजुर्गों के लिए सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों के बावजूद हम देखते हैं कि विभिन्न सेवाओं तक पहुंच में वरिष्ठ नागरिकों को काफी दिक्कतें होती है । कई बार बैंकों, सरकारी कार्यलय, बसों, ट्रेनों में कतारों में बुजुर्गों को खड़े रहना पड़ता है।’’ उन्होंने अफसोस जताया कि बुजुर्गों की समस्याओं की तरफ लोगों का कम ध्यान जा पाता है ।

राज्यसभा के सभापति नायडू ने कहा, ‘‘सांसद बुजुर्गों के बारे में कुछ ही सवाल उठा पाते हैं । एक साल में औसतन 30 सवाल से भी कम आते हैं।’’

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