कोलकाता, 14 मई जाने-माने पौराणिक कथाकार, इतिहासकार और लेखक देवदत्त पटनायक का कहना है कि काल्पनिक कथाओं या इतिहास के विपरीत पौराणिक कथाएं बहुलवादी सत्य हैं जिसकी कई व्याख्याएं हैं, और इन सभी का सम्मान किया जाना चाहिए।
पटनायक ने बंगाल चैंबर और सिस्टर निवेदिता विश्वविद्यालय द्वारा यहां आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि एक ही मिथक के विभिन्न संस्करणों के प्रति विभिन्न समुदायों द्वारा विश्वास व्यक्त किया जाता है, इसलिए पौराणिक कथाओं और इतिहास का घालमेल नहीं होना चाहिए तथा इसे लेकर भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए।
पटनायक ने कहा, ‘‘काल्पनिकता किसी का सच नहीं है, लेकिन तथ्य सबका सच है। मिथक किसी का सच हो सकता है। मेरे पास एक सच है, आपके पास एक सच है, उसके पास एक सच है, हम सबके पास एक सच है। ’’
प्रसिद्ध इतिहासकार ने भगवान राम और भगवान हनुमान के जन्मस्थान सहित पौराणिक घटनाओं के बारे में बहस का स्पष्ट रूप से जिक्र करते हुए कहा, ‘‘मुझे सत्य का सम्मान करना चाहिए, यह मिथक है। लोग पूछते हैं कि भगवान हनुमान का जन्म कहां हुआ था। (मान्यता के अनुसार) उनका जन्म विभिन्न स्थानों पर हुआ था, और हर जगह एक ऐसा मंदिर है। यदि भगवान हनुमान के दस जन्मस्थान हैं, तो हमें बहुलवादी दृष्टिकोण से इस तथ्य की सराहना करनी चाहिए। हम सभी को अनेक सत्यों के सह अस्तित्व का आनंद लेना चाहिए और उसका उत्सव मनाना चाहिए। तुम्हारा सत्य मेरा सत्य है। आइए जानें एक-दूसरे का सच।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इतिहास का अर्थ रिपोर्टिंग है, लेकिन पुराणों की रिपोर्टिंग नहीं की जाती है। पुराण के इतिहासकारों ने दावा किया है कि उन्होंने घटनाओं को दर्ज किया क्योंकि उन्होंने इसे प्रकट होते देखा।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)












QuickLY