सरसों किसानों पर वायदा कारोबार की मार, मई वायदा समर्थन मूल्य से 20 प्रतिशत नीचे
देश में लॉकडाउन’ की वजह से होटल, रेस्तरां, छोटी दुकानें बंद होने के कारण मांग नहीं होने के बावजूद आयात शुल्क मूल्य और एक्सचेंज रेट बढ़ने से आयातित सीपीओ और पामोलीन तेल कीमतों में सुधार दिखा।
नयी दिल्ली, 19 अप्रैल सरसों, सोयाबीन, बिनौला, मूंगफली जैसे घरेलू स्तर पर पैदा होने वाले तेलों की मांग बढ़ने से बीते सप्ताह दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में तेल कीमतों में सुधार दर्ज किया गया। वहीं किसानों को नई सरसों के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बाजार मिलना मुश्किल बना हुआ है। वायदा बाजार में सरसों का भाव नीचे बोले जाने से उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है।
देश में लॉकडाउन’ की वजह से होटल, रेस्तरां, छोटी दुकानें बंद होने के कारण मांग नहीं होने के बावजूद आयात शुल्क मूल्य और एक्सचेंज रेट बढ़ने से आयातित सीपीओ और पामोलीन तेल कीमतों में सुधार दिखा।
बाजार सूत्रों ने कहा कि देशी तेलों की मांग बढ़ने से सरसों 42 प्रतिशत कंडीशन का भाव (मंडी शुल्क, बारदाना, अन्य खर्च सहित) समीक्षाधीन सप्ताह में 35 रुपये सुधरकर 4,225- 4,250 रुपये प्रति क्विन्टल बोला गया। जबकि तेल सरसों दादरी 50 रुपये सुधरकर 8,700 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुआ। सरसों पक्की और सरसों कच्ची घानी के भाव भी 15-15 रुपये सुधरकर क्रमश: 1,385-1,530 रुपये और 1,455-1,575 रुपये प्रति टिन रहे।
उन्होंने कहा कि सरकार ने एक अप्रैल से सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 4,425 रुपये क्विन्टल (लूज में- बिना तेल कंडीशन, मंडी शुल्क, खर्चे अलग) तय कर रखा है। सटोरियों द्वारा मंडियों में सरसों की आवक शुरू होने से ठीक पहले भाव तोड़ने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। जयपुर वायदा कारोबार में सरसों के मई, जून, अनुबंध का भाव (42 प्रतिशत कंडीशन, बारदाना, मंडी शुल्क, खर्चे सहित) 4,060 रुपये और 4,070 रुपये प्रति क्विन्टल बोला जा रहा है। इन खचों के भुगतान के बाद किसान के हाथ में 3,500- 3,550 रुपये ही आयेंगे। इस प्रकार उन्हें समर्थन मूलय से 20 प्रतिशत नीचे भाव ही मिल पायेगा। इस बार सरसों में 38 से 39 प्रतिशत तेल की मात्रा ही बताई जा रही है जो कि पिछले साल के मुकाबले दो- तीन प्रतिशत तक कम है।
सेहत के प्रति बढ़ती जागरुकता और हल्के तेलों की मांग निकलने से मूंगफली दाना और मूंगफली गुजरात के भाव 55 रुपये और 300 रुपये सुधरकर क्रमश: 4,865-4,915 रुपये और 13,350 रुपये प्रति क्विन्टल पर पहुंच गए। मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड भाव भी 25 रुपये का सुधार प्रदर्शित करता 1,985- 2,035 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।
कमजोर मांग के बावजूद वनस्पति घी समीक्षाधीन सप्ताहांत में 50 रुपये सुधरकर 1,115-1,220 रुपये प्रति टिन (15 किग्रा) पर बंद हुआ जबकि तिल मिल डिलिवरी भाव 10,500-15,000 रुपये रुपये प्रति क्विंटल पर अपरिवर्तित रहा।
दूसरी ओर मांग के साथ साथ आयात शुल्क मूल्य बढ़ने से सोयाबीन दाना और लूज के भाव, पिछले सप्ताहांत के मुकाबले 25 रुपये और 50 रुपये सुधार के साथ क्रमश: 4,050-4,100 रुपये और 3,850-3,900 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुए। विदेशों में मजबूती के रुख और मांग बढ़ने के कारण सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली, सोयाबीन इंदौर और सोयाबीन डीगम के भाव भी 200 रुपये, 330 रुपये और 240 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 9,230 रुपये, 8,940 रुपये और 8,000 रुपये प्रति क्विंटल का भाव रहा।
आयात शुल्क मूल्य में 15 अप्रैल को हुई वृद्धि के कारण सीपीओ एक्स कांडला, पामोलीन दिल्ली और पामोलीन कांडला तेल के भाव क्रमश: 250 रुपये, 270 रुपये और 340 रुपये के सुधार दर्शाते क्रमश: 6,680 रुपये, 8,150 रुपये और 7,420 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुए।
स्थानीय तेलों की मांग के चलते बिनौला मिल डिलिवरी हरियाणा तेल की कीमत भी 270 रुपये सुधरकर समीक्षाधीन सप्ताहांत में 8,220 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुई।
राजेश
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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 19, 2020 05:57 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

