देश की खबरें | झूठी शान की खातिर हत्या : शीर्ष अदालत ने हत्या का आरोप तय करने का आदेश दिया
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नयी दिल्ली, 18 अप्रैल उत्तर प्रदेश में झूठी शान की खातिर हत्या के एक मामले में गैर इरादतन हत्या का हल्का आरोप तय किए जाने से नाराज उच्चतम न्यायालय ने एक परिवार के सदस्यों के खिलाफ हत्या का कठोर आरोप तय करने का आदेश दिया।
गैर इरादतन हत्या का आरोप तय करने के निचली अदालत और उच्च न्यायालय के आदेशों को निरस्त करते हुए प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वह 26 वर्षीय जिया-उर रहमान के पिता की सहमति से सहारनपुर की एक अदालत में मुकदमा चलाने के लिए एक विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) नियुक्त करें।
भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत, अपराध का मुख्य घटक हत्या करने का इरादा है और दोषी को आजीवन कारावास या मौत की सजा सुनाई जाती है।
गैर इरादतन हत्या के आरोप में, कृत्य करने वाले व्यक्ति की मंशा या ज्ञान का अभाव होता है, जिसके परिणामस्वरूप मृत्यु होती है, और इसके परिणामस्वरूप, कम सजा का प्रावधान होता है, जो 10 वर्ष की जेल अवधि से लेकर आजीवन कारावास तक हो सकती है।
रहमान दूसरे धर्म से ताल्लुक रखने वाली अपनी प्रेमिका के साथ पकड़ा गया था। इसके बाद महिला के परिवार के सदस्यों ने उस पर लोहे की छड़ों और डंडों से जानलेवा हमला किया, जिसके कारण 2023 में उसकी मौत हो गई।
प्रधान न्यायाधीश ने 17 अप्रैल को निचली अदालत द्वारा आरोपियों के खिलाफ हल्के आरोप तय करने पर हैरानी जताई थी। उनके खिलाफ इस आधार पर हल्के आरोप लगाये गये थे कि घटना में किसी भी आग्नेयास्त्र का इस्तेमाल नहीं किया गया था, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आरोपियों की मंशा और जानकारी का अभाव था।
उन्होंने कहा, ‘‘यह पूरी तरह से हत्या (का मामला) है। यह झूठी शान के लिये हत्या का मामला है। सिर्फ इसलिए कि एक व्यक्ति दूसरे धर्म से ताल्लुक रखता था, आपने उसे मार डाला... पीड़ित के शरीर पर 10 चोट के निशान पाए गए हैं।’’
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हमें थोड़ी हैरानी हो रही है कि क्यों भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया और उसके बाद निचली अदालत ने धारा 304 के तहत आरोप तय करते हुए कहा कि किसी आग्नेयास्त्र का इस्तेमाल नहीं किया गया था और इसलिए धारा 302 के तहत कोई आरोप नहीं बनता... उच्च न्यायालय ने इस फैसले को बरकरार रखा।’’
पीठ ने राज्य सरकार से मृतक के पिता अय्यूब अली से परामर्श करने के बाद विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने को कहा और आरोपी परिवार के सदस्यों से कहा कि वे हत्या के आरोप तय करने के मद्देनजर नये सिरे से जमानत मांगें।
हालांकि, पीठ ने कहा कि आरोपियों को तब तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, जब तक कि उनकी नयी जमानत याचिकाओं पर गुण-दोष के आधार पर फैसला नहीं हो जाता।
उच्च न्यायालय ने 31 अगस्त, 2024 को अली की याचिका खारिज कर दी थी।
अली ने उच्च न्यायालय में सहारनपुर के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के 27 फरवरी 2024 के आदेश को चुनौती दी, जिसमें जनेशर, मानेशर, प्रियांशु और शिवम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आरोप तय करने की उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया था।
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