देश की खबरें | नगर निकाय, डीडीए भूकंपीय स्थिरता की आवश्यकता में इमारतों संबंधी कदमों की जानकारी दें: उच्च न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को यहां के नगर निकायों तथा डीडीए से पूछा कि उन्होंने अधिक खतरे वाली इमारतों की पहचान करने और उन्हें नोटिस जारी करने के बाद भूकंपीय स्थिरता की आवश्यकता में क्या कदम उठाए हैं।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 29 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को यहां के नगर निकायों तथा डीडीए से पूछा कि उन्होंने अधिक खतरे वाली इमारतों की पहचान करने और उन्हें नोटिस जारी करने के बाद भूकंपीय स्थिरता की आवश्यकता में क्या कदम उठाए हैं।

मुख्य न्यायाधीश न्यूायमूर्ति डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने निगम इकाइयों और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को निर्देश दिया कि वे भूकंपीय स्थिरता की आवश्यकता वाली इमारतों के मालिकों को नोटिस जारी करने के बाद उठाए गए कदमों से संबंधित रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें।

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अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित करते हुए अधिकारियों से कहा, ‘‘आप हमें प्रगति दिखाएं।’’

पीठ ने दिल्ली सरकार को भी नोटिस जारी किया और यह बताने को कहा कि पिछले साल अप्रैल में जारी अधिसूचना के अनुरूप क्या राष्ट्रीय राजधानी में इमारतों की भूकंपीय स्थिरता के मामले को देखने के लिए कोई विशेषज्ञ समिति गठित की गई है।

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अदालत ने यह निर्देश याचिकाकर्ता-अधिवक्ता अर्पित भार्गव के आवेदन के संदर्भ में दिया जिसमें दिल्ली में इमारतों को मजबूत करने के लिए कार्ययोजना का समय पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के वास्ते एक निगरानी समिति गठित करने का आग्रह किया गया है।

उन्होंने कहा कि 12 अप्रैल से तीन जुलाई के बीच राष्ट्रीय राजधानी में 14 बार भूकंप आ चुका है।

भार्गव ने यह भी कहा कि क्योंकि केंद्र ने अपने द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में कोई उत्तर या शपथपत्र दायर नहीं किया है, इसलिए विज्ञान भवन और शास्त्री भवन तथा इस तरह की अन्य इमारतों के बारे में यह स्पष्टता नहीं है कि वे भूकंपीय दृष्टिकोण से मजबूत हैं या नहीं।

नगर निगमों ने इस बीच, इस तरह के शपथपत्र दायर कर कहा कि उन्होंने अपने अधिकारक्षेत्र में आने वाली इमारतों की स्थिरता का आकलन करने के लिए 144 अवसंरचना अभियंताओं को काम पर लगाया है।

उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में इमारतों की भूकंपीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए कार्ययोजना का क्रियान्वयन न करने पर 18 अगस्त को दिल्ली सरकार तथा सभी स्थानीय अधिकरणों की खिंचाई की थी।

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