देश की खबरें | मुंद्रा बंदरगाह मादक पदार्थ मामला: अफगानिस्तान के नागरिक को तीन दिन की एनआईए की हिरासम में भेजा गया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. शहर की एक विशेष अदालत ने पिछले महीने गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से 2,988 किलोग्राम मादक पदार्थ की बरामदगी के मामले में अफगानिस्तान के एक नागरिक को तीन दिन की राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की हिरासत में भेज दिया है।
अहमदाबाद, 26 अक्टूबर शहर की एक विशेष अदालत ने पिछले महीने गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से 2,988 किलोग्राम मादक पदार्थ की बरामदगी के मामले में अफगानिस्तान के एक नागरिक को तीन दिन की राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की हिरासत में भेज दिया है।
विशेष न्यायाधीश शुभदा बक्शी ने 21 हजार करोड़ रुपये के मादक पदार्थ की बरामदगी के मामले में आरोपी मोहम्मद खान को सोमवार को एनआईए की हिरासत में भेज दिया। उसे ट्रांजिट वारंट पर पटियाला से यहां लाया गया था।
एनआईए ने विशेष अदालत से आरोपी को चार दिन की हिरासत में देने का अनुरोध किया था।
इससे पहले, अदातल ने मामले में तीन अन्य आरोपियों को 18 अक्टूबर को 10 दिन की एनआईए की हिरासत में भेज दिया था।
इन तीन आरोपियों में एम सुधाकरन, राजकुमार पी और दुर्गा वैशाली शामिल हैं, जो कथित तौर पर विजयवाड़ा-पंजीकृत ‘मेसर्स आशी ट्रेडिंग कम्पनी’ चलाते थे, जिसने ‘टैल्क स्टोन्स’ की एक खेप का आयात किया था।
एनआईए के लिए विशेष लोक अभियोजक अमित नायर ने कहा, ‘‘ मामले की जांच के दौरान खान का नाम सामने आया और उसके खिलाफ ‘लुकआउट नोटिस’ जारी किया गया। अधिकारियों ने उसे दिल्ली हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया था, जब वह देश से बाहर भागने की कोशिश कर रहा था। इसके बाद उसे एनआईए के हवाले कर दिया गया और पटियाला लाया गया था।’’
राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने 13 सितंबर को दो कंटेनरों को कब्जे में लिया था, जो ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह के माध्यम से अफगानिस्तान के कंधार से होते हुए मुंद्रा बंदरगाह पहुंचे थे। कंटेनरों के साथ की गई घोषणा में दावा किया गया था कि उनके पास ‘‘अर्ध संसाधित टैल्क पत्थर’’ हैं। हालांकि गहन जांच से पता चला कि दोनों कंटेनरों में वास्तव में 2988 किलोग्राम हेरोइन थी, जिसकी कीमत 21,000 करोड़ रुपये थी और उसे टैल्क पत्थरों के साथ ‘‘बड़े-बड़े बैग’’ में ‘‘निचली परतों’’ में छुपाया गया था।
इस मामले की जांच पहले राजस्व खुफिया निदेशालय कर रहा था। केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने बाद में मामले की जांच एनआईए को सौंप दी थी।
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