देश की खबरें | बोझ तले दबी मुंबई की स्वास्थ्य प्रणाली का संकेत है केईएम अस्पताल में हुआ प्रदर्शन

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. निगम द्वारा संचालित सरकारी किंग एडवर्ड मेमोरियल (केईएम) अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा किया गया प्रदर्शन यह दर्शाता है कि मुंबई की स्वास्थ्य प्रणाली किस बोझ से जूझ रही है और कोविड-19 का सामना कर रही देश की आर्थिक राजधानी को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

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मुंबई, 27 मई निगम द्वारा संचालित सरकारी किंग एडवर्ड मेमोरियल (केईएम) अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा किया गया प्रदर्शन यह दर्शाता है कि मुंबई की स्वास्थ्य प्रणाली किस बोझ से जूझ रही है और कोविड-19 का सामना कर रही देश की आर्थिक राजधानी को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

अस्पताल कर्मचारियों के संघ के एक नेता ने कहा कि कोविड-19 मरीजों की मौत की बढ़ती संख्या के कारण केईएम अस्पताल के शवगृह में जगह पूरी भर गई है और कई शव अस्पताल के गलियारों में पड़े हुए हैं।

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उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों को पर्याप्त सुरक्षात्मक उपकरण और वित्तीय सहायता भी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

बृह्नमुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) की पूर्व में इस बोझ को बांटने के लिये निजी चिकित्सकों की मदद लेने की योजना को लेकर बहुत उत्साहजनक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई और उसके बाद नगर निकाय ने कोविड-19 के मरीजों को भर्ती करने के लिये निजी चिकित्सा प्रतिष्ठानों को अधिग्रहित करना शुरू किया।

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केईएम अस्पताल में मंगलवार को एक स्वास्थ्यकर्मी की मौत के बाद कर्मचारी भड़क गए और प्रदर्शन किया। इन कर्मचारियों का आरोप था कि कोरोना वायरस संकट के दौरान बीएमसी उनके काम करने की स्थिति के प्रति उदासीन है।

अस्पताल प्रबंधन ने जहां कर्मचारियों को और सुविधाएं उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है वहीं चिकित्सकों और अन्य कर्मियों ने चिंता जाहिर की कि वे रोज मरीजों की देखभाल करते हुए “जिंदगी और मौत की जंग” से कैसे जूझते रहेंगे।

मुंबई के परेल इलाके में स्थित केईएम अस्पताल को समर्पित कोविड-19 अस्पताल में बदल दिया गया है और यहां रोजाना बड़ी संख्या में इलाज के लिये लोग आ रहे हैं।

कई बड़ी कंपनियों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों का मुख्यालय यहां है और यह शहर सेवा क्षेत्र में लाखों मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराता है।

कोरोना वायरस संक्रमित ऐसे बहुत से कामगार इस अस्पताल में इलाज की उम्मीद लिये पहुंच रहे हैं, लेकिन यहां भर्ती होने के लिये बिस्तर खाली होने के इंतजार में ही कई घंटे बीत जाते हैं।

मरने वालों की बढ़ती संख्या भी प्रबंधन के लिये बड़ी चिंता है क्योंकि शवों को पूरे इंतजाम के साथ निस्तारित करने में काफी वक्त लगता है।

केईएम कर्मचारी संघ के नेता संतोष धूरी कहते हैं, “केईएम के शवगृह में सिर्फ 27 शव रखे जा सकते हैं। लेकिन, सारी जगह कोविड-19 मरीजों के शवों से भरी हैं और अन्य शवों को गलियारों में रखा गया है। गलियारों में दोनों तरफ करीब 15 स्ट्रेचरों पर शव रखे हैं। यह गलियारा दूसरी मंजिल की तरफ जाता है जहां प्रयोगशाला है।”

उन्होंने कहा, “कर्मचारियों को सुरक्षात्मक किट और बीमार पड़ने की सूरत में आर्थिक मदद का भरोसा चाहिए। बीएमसी और राज्य सरकार ने इस मुद्दों का कोई संतोषजनक समाधान नहीं किया है, जबकि हमने इस बारे में कई बार उन्हें आगाह किया और प्रदर्शन भी किया।”

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने हाल में कहा था कि कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिये सिर्फ आईसीयू की ही जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा, “हमारी मूलभूत जरूरत और बिस्तरों की है जहां ऑक्सीजन आपूर्ति की सुविधा हो। हमें ज्यादा से ज्यादा लोगों के इलाज के लिये ऑक्सीजन आपूर्ति युक्त कम से कम 10 हजार बिस्तर चाहिए। हम चाहते हैं कि शहर फिर से पटरी पर लौटे लेकिन उससे पहले हमें हर कोरोना वायरस संक्रमित मरीज की पहचान करनी होगी।”

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