देश की खबरें | मप्र उच्च न्यायालय ने हास्य कलाकार मुनव्वर फारुकी समेत दो लोगों की जमानत याचिकाएं खारिज कीं
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. अदालत ने अपने इस आदेश में यह भी कहा कि देश में अलग-अलग तबकों के बीच सौहार्द्र और भाईचारा बढ़ाने के प्रयास किए जाने चाहिए।
अदालत ने अपने इस आदेश में यह भी कहा कि देश में अलग-अलग तबकों के बीच सौहार्द्र और भाईचारा बढ़ाने के प्रयास किए जाने चाहिए।
उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति रोहित आर्य ने फारुकी और यादव की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सोमवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
एकल पीठ ने बृहस्पतिवार को जारी फैसले में दोनों आरोपियों की याचिकाएं खारिज करते हुए कहा, "मुकदमे के गुण-दोषों को लेकर संबंधित पक्षों की दलीलों पर अदालत कोई भी टिप्पणी करने से बच रही है। लेकिन मामले में जब्त सामग्री, गवाहों के बयानों और (पुलिस की) जांच जारी होने के चलते फिलहाल जमानत याचिकाओं को मंजूर नहीं किया जा सकता।"
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने फारुकी की ओर से पैरवी करते हुए सोमवार को उच्च न्यायालय से कहा था कि उनके मुवक्किल ने इंदौर के एक कैफे में एक जनवरी को आयोजित कार्यक्रम में ऐसा कोई भी शब्द नहीं कहा था जिससे किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती हो।
बहरहाल, शिकायतकर्ता एकलव्य सिंह गौड़ तथा मामले के कुछ गवाहों ने दंड प्रकिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 161 के तहत दर्ज बयानों में फारुकी और यादव के खिलाफ हिंदू देवी-देवताओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियों के आरोप लगाए गए हैं।
एकल पीठ ने बृहस्पतिवार के अपने आदेश में रेखांकित किया कि उसने ‘केस डायरी’ का अच्छी तरह अवलोकन किया है।
अदालत ने कहा, "मामले में अब तक जब्त सबूत और सामग्री पहली नजर में इशारा करती है कि (विवादास्पद) स्टैंड-अप कॉमेडी शो की आड़ में वाणिज्यिक तौर पर आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में आरोपी द्वारा भारत के एक वर्ग के नागरिकों की धार्मिक भावनाओं को जान-बूझकर आहत करने के इरादे से अपमानजनक बातें कही गई थीं।"
बहरहाल, एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि उसके मौजूदा आदेश में मुकदमे के तथ्यों को लेकर की गई प्रत्येक टिप्पणी दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर निर्णय करने भर से संबंधित है और ऐसी किसी भी टिप्पणी का प्रकरण की निचली अदालत में लम्बित सुनवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
एकल पीठ ने अपने 10 पृष्ठ के आदेश में यह भी कहा कि भारत एक सुंदर देश है और धर्म, , संस्कृति और भौगालिक स्थानों की तमाम विविधताओं के बीच सभी लोगों के मिल-जुलकर रहने की नजीर पेश करता है।
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