देश की खबरें | महंगे रियल एस्टेट क्षेत्र में भूमि पट्टा किराया बढ़ाने का कदम मनमाना नहीं: बंबई उच्च न्यायालय

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मुंबई, 11 जुलाई बंबई उच्च न्यायालय ने ‘रेडी रेकनर’ (आरआर) दर के आधार पर मुंबई के बांद्रा में पट्टा किराया बढ़ाने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा है कि यह ‘‘मनमाना’’ कदम नहीं है क्योंकि उपनगर एक महंगा रियल एस्टेट क्षेत्र है।

‘रेडी रेकनर’ को ‘सर्किल रेट’ के नाम से भी जाना जाता है जो किसी विशेष क्षेत्र में संपत्तियों के लिए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मूल्यांकन है।

न्यायमूर्ति बी.पी. कोलाबावाला और न्यायमूर्ति सोमशेखर सुंदरेसन की खंडपीठ ने हालांकि कहा कि सरकार के प्रस्तावों के अनुसार, किराए में हर पांच साल में संशोधन नहीं किया जा सकता और पट्टा समझौते की पूरी अवधि के दौरान इसे एक समान रहना होगा।

अदालत ने बांद्रा में कई आवासीय सोसाइटी द्वारा दायर उन याचिकाओं का बुधवार को निपटारा कर दिया, जिनमें उन्हें दिए गए दीर्घकालिक पट्टों के किराए को संशोधित करने वाले 2006, 2012 और 2018 के सरकारी प्रस्तावों को चुनौती दी गई थी।

अदालत ने कहा कि इन सोसाइटी के पास बांद्रा के प्रमुख स्थान पर लगभग मुफ्त में भूमि का बड़ा हिस्सा है।

उसने कहा, ‘‘यदि कोई वास्तव में यह देखे कि ये लोग उन्हें पट्टे पर दी गई सरकारी भूमि के लिए अब कितना भुगतान कर रहे हैं, तो इसे शायद ही अत्यधिक माना जाए।’’

सरकार ने इन प्रस्तावों के माध्यम से देय पट्टा किराया निर्धारित करने के लिए आरआर को अपनाने का नीतिगत निर्णय लिया।

विभिन्न सोसाइटी ने दावा किया कि ये प्रस्ताव अवैध हैं क्योंकि वे पट्टा किराए को ‘‘400 से 1900 गुना’’ बढ़ाने की मांग कर रहे थे जो ‘‘अत्यधिक’’ हैं।

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