जरुरी जानकारी | ज्यादातर खाद्यतेल तिलहन के भाव टूटे

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शुक्रवार को सभी तेल-तिलहन कीमतों में उठा पटक जारी रही और सरसों तिलहन, मूंगफली तेल तिलहन, सोयाबीन दिल्ली एवं इंदौर तेल, पामोलीन तेल और बिनौला तेल के भाव गिरावट के साथ बंद हुए जबकि सरसों तेल, सोयाबीन तिलहन, सोयाबीन डीगम तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) कीमतें पूर्वस्तर पर बनी रहीं।

नयी दिल्ली, 12 मई दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शुक्रवार को सभी तेल-तिलहन कीमतों में उठा पटक जारी रही और सरसों तिलहन, मूंगफली तेल तिलहन, सोयाबीन दिल्ली एवं इंदौर तेल, पामोलीन तेल और बिनौला तेल के भाव गिरावट के साथ बंद हुए जबकि सरसों तेल, सोयाबीन तिलहन, सोयाबीन डीगम तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) कीमतें पूर्वस्तर पर बनी रहीं।

मलेशिया एक्सचेंज में 1.1 प्रतिशत की तेजी थी जबकि शिकागो एक्सचेंज में आधा प्रतिशत की गिरावट है।

बाजार सूत्रों ने बताया कि प्रमुख तेल संगठन, साल्वेंट एक्स्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) के कार्यकारी निदेशक, बी वी मेहता ने कहा कि सरकार द्वारा सूरजमुखी एवं सोयाबीन तेल के एक सीमित मात्रा में शुल्कमुक्त आयात की छूट दिये जाने से रिफाइनरी वालों को फायदा होगा और देश के सरसों किसानों की आय में मामूली कमी होगी और तिलहनों के दामों में भी कमी आयेगी।

सूत्रों ने कहा कि एक प्रमुख तेल संगठन के पदाधिकारी क्या इस बात से अवगत हैं कि मंडियों में सरसों के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से लगभग 20 प्रतिशत नीचे हैं। यह हालत सिर्फ सस्ते आयातित खाद्यतेलों की वजह से है। क्या उनकी चिंता देश में तिलहन उत्पादन बढ़ाना नहीं है, केवल खाद्यतेल की उपलब्धता बढ़ाना है ? तो फिर उन्हें पाम, पामोलीन और रेपसीड पर भी आयात शुल्क खत्म करने के बारे में बोलना चाहिये था।

मौजूदा नीति देश को तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता दिलाने के उलट आयात पर पूरी तरह निर्भर बना देगा। मौजूदा हालात से तिलहन किसान और तेल उद्योग जर्जर स्थिति में हैं।

मेहता ने कहा है कि अप्रैल में पामतेल का आयात 14 महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गया।

उद्योग जगत के सूत्रों ने कहा कि लगभग पांच महीने पहले सूरजमुखी और सोयाबीन तेल का दाम पामोलीन से 40 रुपये लीटर अधिक हुआ करता था जो अब शुल्कमुक्त आयात के कारण पामोलीन से 5-7 रुपये लीटर नीचे हो गया है। कम आयवर्ग के लोगों में खाये जाने वाले पामोलीन के उपभोक्ताओं को क्या सूरजमुखी तेल उपलब्ध होगा क्योंकि प्रीमियम राशि के कारण यह महंगे में (लगभग 150 रुपये लीटर के भाव) बिक रहा है। फिर गरीब उपभोक्ता कहां जायेंगे ? आयातित तेल का भाव बंदरगाह पर 80-85 रुपये लीटर है और देशी तेल सरसों का भाव 125 रुपये लीटर बैठता है। जब तेल खपेगा नहीं तो किसान अगली बार बिजाई कैसे करेंगे ?

शुक्रवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 4,925-5,025 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,650-6,710 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,470 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,480-2,745 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 9,250 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,585-1,665 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,585-1,695 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,250 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,140 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,550 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,850 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,900 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,150 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 9,200 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,350-5,400 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 5,100-5,180 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

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