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बंगाल, मप्र, गुजरात जैसे राज्यों में ज्यादातर जिले कोविड-19 के लिहाज से संवदेनशील : अध्ययन

अधिक असुरक्षित जिले वे हैं जहां कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका है।

बंगाल, मप्र, गुजरात जैसे राज्यों में ज्यादातर जिले कोविड-19 के लिहाज से संवदेनशील : अध्ययन
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नयी दिल्ली, 13 मई बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात के साथ ही राजस्थान और महाराष्ट्र में ज्यादातर जिले कोविड-19 के लिहाज से अधिक संवेदनशील हैं। एक गैर लाभकारी जन स्वास्थ्य संगठन के अध्ययन में यह बात कही गई है।

अधिक असुरक्षित जिले वे हैं जहां कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका है।

स्वस्ति संगठन के अध्ययन के अनुसार, वायरस के लिहाज से मध्यम संवदेनशीलता वाले क्षेत्र के तौर पर कर्नाटक के उत्तरी जिलों, पूर्वी महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के पूर्वी जिलों को देखा गया। इस अध्ययन में उन तत्वों पर अधिक गौर किया गया है जो कुछ भौगोलिक क्षेत्रों तथा समुदायों को अन्य के मुकाबले अधिक असुरक्षित बनाते हैं।

सर्वेक्षण के अनुसार, केरल, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब, जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों के ज्यादातर जिले कम असुरक्षित पाए गए।

स्वस्ति ने एक बयान में कहा, ‘‘हालांकि भारतीय अन्य बीमारियों और उम्र जैसे खतरे के कई कारणों को पहचानते हैं लेकिन अन्य तत्वों तक उनकी समझ बहुत सीमित है।’’

एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार, 15 ऐसी चीजें है जो कोविड-19 की संवेदनशीलता को प्रभावित करती हैं जैसे कि सामाजिक आर्थिक तत्व। सामाजिक आर्थिक तत्वों कम आय या शिक्षा का कम स्तर, जनसांख्यिकी कारण (आबादी और शहरीकरण), स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के तत्व (एनीमिया का स्तर या बार-बार हाथ धोना) और पर्यावरणीय तत्व जैसे कि तापमान और सापेक्ष आर्द्रता आदि शामिल हैं।

स्वस्ति के अध्ययन के अनुसार, इन तत्वों के एक साथ होने से कोई भी व्यक्ति संक्रमण के लिहाज से 74 प्रतिशत अधिक संवेदनशील हो सकता है।

इस अध्ययन से यह संकेत मिलता है कि बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात तथा राजस्थान और महाराष्ट्र में ज्यादातर जिले संक्रामक रोग के लिहाज से अधिक संवेदनशील हैं।

इसमें कहा गया है कि कई जिले पहले से ही खतरनाक स्थिति में हैं।

स्वस्ति की डॉ. एंजेला चौधरी ने कहा, ‘‘इस अध्ययन का मकसद महामारी के असर को कम करना है।’’

यह अध्ययन दीपांकर भट्टाचार्य और डॉ. एंजेला चौधरी ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय विकास अध्ययन केंद्र के डॉक्टोरल रिसर्च फेलो इस्माइल हक और स्वस्ति में लर्निंग कैटेलिस्ट रिया जॉन के सहयोग से किया है।

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(The above story first appeared on LatestLY on May 13, 2020 04:26 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).