देश की खबरें | राष्ट्रव्यापी अभियान के लिए 5 सितंबर को साथ आएंगे 400 से अधिक मानवाधिकार संगठन
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. समाज के हाशिये पर पड़े वर्ग द्वारा जिन समस्याओं का सामना किया जा रहा है उसके विरुद्ध आवाज उठाने के लिए पांच सितंबर को एक राष्ट्रव्यापी अभियान में 400 से अधिक मानवाधिकार संगठन एकत्रित होंगे।
नयी दिल्ली, 27 अगस्त समाज के हाशिये पर पड़े वर्ग द्वारा जिन समस्याओं का सामना किया जा रहा है उसके विरुद्ध आवाज उठाने के लिए पांच सितंबर को एक राष्ट्रव्यापी अभियान में 400 से अधिक मानवाधिकार संगठन एकत्रित होंगे।
कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
एक प्रेस वार्ता में कार्यकर्ताओं ने कहा कि ‘हम अगर उठे नहीं तो’ नामक अभियान की शुरुआत सड़कों पर प्रदर्शन और सोशल मीडिया के जरिये की जाएगी।
कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने कहा कि अभियान का लक्ष्य देश के सभी वर्गों तक पहुंचने का है।
यह भी पढ़े | Chennai Airport: साड़ी और शर्ट में छिपाकर पार्सल के जरिए भेज रहे थे 1.36 कोरोड़ रुपये, कस्टम ने किया जब्त.
हाशमी ने कहा, “कोविड-19 के कारण हम बड़ी संख्या में सड़कों पर नहीं आ सकेंगे लेकिन मुद्दों पर वीडियो बनाए जाएंगे और सोशल मीडिया पर सीधा प्रसारण किया जाएगा और उन मुद्दों पर पोस्टर, कलाकृतियां और पेंटिंग बनाई जाएगी जिन पर लोग आवाज उठाना चाहते हैं।”
सतर्क नागरिक संगठन की संस्थापक सदस्य और लोगों के सूचना के अधिकार के अभियान की सह समन्वयक अंजलि भारद्वाज ने कहा कि भारत के लोकतंत्र और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर “अप्रत्याशित हमला” हुआ है।
उन्होंने कहा, “कोविड-19 संकट का जिस प्रकार से सामना किया गया उससे भी गरीब विरोधी सरकार बेपर्दा हुई है। जिस प्रकार लॉकडाउन की घोषणा की गई और किसानों, प्रवासी श्रमिकों और यौन कर्मियों को दिक्क्त का सामना करना पड़ा और जिस तरह उनके रोजगार छिन गए, सरकार ने इनकी समस्या को सुलझाने के लिए कुछ नहीं किया।”
अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संघ की सचिव कविता कृष्णन ने कहा कि इस अभियान के जरिये बहुत से आंदोलन साथ आकर अपनी बात कहेंगे।
कृष्णन ने कहा, “सरकार उस भारत को बदलने का तेजी से प्रयास कर रही है जिसे हम जानते हैं। अगर हम राष्ट्रीय शिक्षा नीति को देखें तो यह असमानता को प्रोत्साहित करने के लिए लाई गई है। पर्यावरण प्रभाव समीक्षा के माध्यम से वह पर्यावरण समीक्षा के कदमों से पीछा छुड़ाना चाहते हैं और वे श्रम कानूनों को भी समाप्त करना चाहते हैं।”
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में भारत के संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हम साथ आए हैं।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)