देश की खबरें | ‘भारत को अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता का केंद्र बनाने के लिए और अधिक प्रयास की जरूरत’

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. ‘‘भारत को अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता का केंद्र बनाने के लिए सरकार और सभी हितधारकों को और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है तथा यह भी आवश्यक है कि मध्यस्थता कानून समकालीन कार्यप्रणाली के अनुरूप हो।’’

अहमदाबाद, 23 अप्रैल ‘‘भारत को अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता का केंद्र बनाने के लिए सरकार और सभी हितधारकों को और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है तथा यह भी आवश्यक है कि मध्यस्थता कानून समकालीन कार्यप्रणाली के अनुरूप हो।’’

ये बातें अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता को लेकर शनिवार को आयोजित संगोष्ठी में प्रमुख वक्ताओं ने कहीं, जिनमें उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश भी शामिल हैं।

उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश बेला एम. त्रिवेदी ने अफसोस जताया कि एक प्रभावी विवाद समाधान प्रक्रिया के बावजूद, ‘विलंब, उच्च लागत, विभिन्न चरणों में बार-बार और कभी-कभी अनुचित न्यायिक व्यवधान’ से मध्यस्थता बाधित हो रही है।

न्यायमूर्ति त्रिवेदी ने वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए मध्यस्थता से संबंधित कानून लागू करने में आने वाली कमियों और खामियों को जल्द से जल्द दूर करने का भी आह्वान किया।

न्यायमूर्ति एम आर शाह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार अभी तक भारतीय वाणिज्यिक मध्यस्थता संस्थान को स्वीकार नहीं कर सका है। उन्होंने हितधारकों से दृष्टिकोण में बदलाव लाने और आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया।

मध्यस्थता तंत्र के संस्थागतकरण की समीक्षा करने और सुधारों को लेकर सुझाव देने के लिए केंद्रीय विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा गठित न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बी एन श्रीकृष्णा समिति का उल्लेख करते हुए, न्यायमूर्ति त्रिवेदी ने कहा कि समिति ने कई सिफारिशें कीं, जबकि कुछ संशोधन अभी तक भी लागू नहीं हुए हैं।

भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने देश के ढांचे के साथ एक ‘मध्यस्थता टाउनशिप’ का सुझाव दिया, जो ‘‘किसी खास मॉडल के लिए विशिष्ट न हो, बल्कि विश्व समुदाय के लिए स्वीकार्य होना चाहिए।’’

गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार ने कहा कि भारत और दुनिया भर में तदर्थ से संस्थागत मध्यस्थता के‘प्रतिमान’ बदले हैं।

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